Дар пои марези ҳалқаи зулфи баланди хеш
در پا مریز حلقهٔ زلف بلند خویش
Тарсам худо накарда шӯии пои банди хеш
ترسم خدا نکرده شوی پایبند خویش
Миннати худоиро ки ба тасхири малики дил
منت خدای را که به تسخیر ملک دل
Ҳоҷат бидон нашуд ки битозӣ саманди хеш
حاجت بدان نشد که بتازی سمند خویش
Ҳайфаст бар лаби ту расонади лабии рақиб
حیف است بر لب تو رساند لبی رقیب
Колўдаҳ магас натавон кард қанди хеш
کالوده مگس نتوان کرد قند خویش
ё аз шиканҷи турраи камандӣ ба раҳ манеҳ
یا از شکنج طره کمندی به ره منه
ё раҳматӣ ба оҳӯии сар дар каманди хеш
یا رحمتی به آهوی سر در کمند خویش
Бо нола дар ғами ту зи баси ху гирифта ам
با ناله در غم تو ز بس خو گرفتهام
Осӯдаам ба нолаи носӯдманди хеш
آسودهام به نالهٔ ناسودمند خویش
Мушкил шудаи сети кори ман аз ишқ рӯй ту
مشکل شدهست کار من از عشق روی تو
Лекин чаҳ чора бо дили мушкили писанди хеш
لیکن چه چاره با دل مشکلپسند خویش
Хӯн мечакад зи ғунча ба кораш агар кунӣ
خون میچکد ز غنچه به کارش اگر کنی
Ширини табассумии зи лаб нӯш ханд хеш
شیرین تبسمی ز لب نوشخند خویش
Шавқи сапанди хол ту кард он чаҳ бо дилам
شوق سپند خال تو کرد آن چه با دلم
Миҷмар накарда зи оташи худ бо сапанди хеш
مجمر نکرده ز آتش خود با سپند خویش
эй шаҳи савори ҳасани фурӯғии асири тест
ای شه سوار حسن فروغی اسیر تست
Ғофил машав зи хоки гирифтори банди хеш
غافل مشو ز خاک گرفتار بند خویش