Имшаби туро ба хӯбии нисбат ба моҳ кардам

امشب تو را به خوبی نسبت به ماه کردم

Ту хубтар зи моҳӣ , ман иштибоҳ кардам

تو خوب تر ز ماهی، من اشتباه کردم

Дӯшинаи пеши рӯяти ойӣнаро ниҳодам

دوشینه پیش رویت آیینه را نهادم

Рӯзи сифеди худро охир сиёҳ кардам

روز سفید خود را آخر سیاه کردم

Ҳар субҳи ёди рӯят то шом гуҳ намудем

هر صبح یاد رویت تا شام گه نمودم

Ҳар шоми фикри мӯят то субҳ гоҳ кардам

هر شام فکر مویت تا صبح گاه کردم

Ту он чаҳ дӯш кардӣ аз нӯк ғамза кардӣ

تو آن چه دوش کردی از نوک غمزه کردی

Ман ҳар чаҳ кардам имшаб аз тир оҳ кардам

من هر چه کردم امشب از تیر آه کردم

Сад гӯшмол дидам то як сухан шунидам

صد گوشمال دیدم تا یک سخن شنیدم

Сад раҳ ба хӯн тапидам то як нигоҳ кардам

صد ره به خون تپیدم تا یک نگاه کردم

Чун хоҷаи рӯзи маҳшари ҷурм маро бубахшад

چون خواجه روز محشر جرم مرا ببخشد

Гар ваъдаи атояши умрӣ гуноҳ кардам

گر وعده عطایش عمری گناه کردم

Ман ҳар ғазал ки гуфтам дар ошиқии фурӯғӣ

من هر غزل که گفتم در عاشقی فروغی

Як ҷогризи онро бар ном шоҳ кардам

یک جاگریز آن را بر نام شاه کردم

Шоҳи ҳамаи салотин , шоистаи Носириддин

شاه همه سلاطین، شایسته ناصرالدین

Каз қаҳри душманашро дар қаър чоҳ кардам

کز قهر دشمنش را در قعر چاه کردم