Омад ба ҷилваи шоҳиди болои баланди мо

آمد به جلوه شاهد بالا بلند ما

Омода шуд балои дили дардманди мо

آماده شد بلای دل دردمند ما

Мо меҳр аз он писари сар мӯе наме барем

ما مهر از آن پسر سر مویی نمی‌بریم

Баранд агар ба ханҷари кини бндбнди мо

برند اگر به خنجر کین بندبند ما

То чашми худ ба давраи соқӣ кушода ем

تا چشم خود به دورهٔ ساقی گشاده‌ایم

Даври замона чашм бибаст аз газанди мо

دور زمانه چشم ببست از گزند ما

Гуфтам ки нӯши доруии ушшоқ хаста чист

گفتم که نوش‌داروی عشاق خسته چیست

Гуфтои табассумии зи лаб нӯш ханд мо

گفتا تبسمی ز لب نوش‌خند ما

Ширини лабон ба хӯни дили худ тапида анд

شیرین لبان به خون دل خود تپیده‌اند

Дар сайдгоҳи хусрави гули гавани саманди мо

در صیدگاه خسرو گل‌گون سمند ما

Тасбеҳи шайхи ҳалқа зуннор ме шавад

تسبیح شیخ حلقهٔ زنار می‌شود

Гар ҷилва гар шавад бути мишкӣни каманди мо

گر جلوه‌گر شود بت مشکین کمند ما

ё раб мабод чашми бади он чашми маст ро

یا رب مباد چشم بد آن چشم مست را

Каз дасти баради ҳуши дили ҳӯшманди мо

کز دست برد هوش دل هوشمند ما

Аз чашм рӯзгор ситонем дод хеш

از چشم روزگار ستانیم داد خویش

Гар донаҳои хок ту гардад сапанди мо

گر دانه‌های خاک تو گردد سپند ما

Бигушо ба ханда ғунча мегаван хеш ро

بگشا به خنده غنچه میگون خویش را

То муддаӣ хамӯш нишинад зи пндмо

تا مدعی خموش نشیند ز پندما

Моро писанд карда фурӯғии зи баҳри ҷӯад

ما را پسند کرده فروغی ز بهر جود

То шуд писанди хотири мушкили писанди мо

تا شد پسند خاطر مشکل پسند ما

Хониш
ғзл шморҳ 44 — ъндлӣб