Зоҳиду сбҳаҳи сад донау зикри саҳарӣ
زاهد و سبحهی صد دانه و ذکر سحری
Ман ва паймудани паймонау девона гарӣ
من و پیمودن پیمانه و دیوانهگری
Чун ҳамаи вазъи ҷаҳони гузарон дар гузар аст
چون همه وضعِ جهانِ گذران در گُذَر است
Магзар аз олами шайдоеу шӯридаи сиррӣ
مَگْذَر از عالَمِ شیدایی و شوریدهسری
То кӣ аз шӯъбадаи давр фалак хоҳад буд
تا کی از شعبدهیِ دورِ فلک خواهد بود
Бодаи айш ба ҷоми ману коми дгарӣ
بادهیِ عیش به جامِ من و کامِ دگری
То шудам бехабар аз хеш , хабарҳо дорам
تا شدم بیخبر از خویش، خبرها دارم
Бе хабари шӯ ки хбрҳост дар ин бе хабарӣ
بیخبر شو که خبرهاست در این بیخبری
То шудам беасар , аз нола асарҳо дидам
تا شدم بیاثر، از ناله، اثرها دیدم
Бе асари шӯ ки асрҳост дар ин бе асарӣ
بیاثر شو که اثرهاست در این بیاثری
То задам лофи ҳунари хоҷа ба ҳеҷам нахарид
تا زدم لافِ هنر، خواجه به هیچم نخرید
Бе ҳунари шӯ ки ҳнрҳост дар ин бе ҳунарӣ
بیهنر شو که هنرهاست در این بیهنری
Сарв озод шуд он дам ки самари ҳеҷ надод
سرو، آزاد شد آندم که ثمر، هیچ نداد
Бе самари шӯ ки смрҳост дар ин бе самарӣ
بیثمر شو که ثمرهاست در این بیثمری
То сари худ нспрдим ба хок дар дӯст
تا سرِ خود نسپردیم به خاکِ درِ دوست
Хотир осӯда нагаштем аз ин дарбаи дарӣ
خاطرآسوده نگشتیم از این دربه دری
Бесутуни тоби дами теша Фарҳод надошт
بیستون، تابِ دمِ تیشهیِ فرهاد نداشت
Ишқро байн ки аз он кӯҳ гарон шуд камарӣ
عشق را بین که از آن کوهِ گران شد کمری
Парӣ аз шарми ту дар парда ниҳон шуд вақте
پری از شرمِ تو در پرده، نهان شد وقتی
Ки бурун омадӣ аз пардаи паии пардаи дарӣ
که برون آمدی از پرده، پیِ پردهدری
Шуҳра шаҳр шудам аз назари ҳиммати шоҳ
شُهرهیِ شهر شدم از نظرِ همّتِ شاه
Ту ба хуши манзарӣу бандаи соҳиби назарӣ
تو به خوشمنظری و بنده به صاحبنظری
Офтоби фалаки адли малики носрдин
آفتابِ فلکِ عدلِ مَلِکِ ناصردین
Ки азуи малики надидаи сет ба ҷуз додгарӣ
که از او، مُلْک ندیدهست بهجز دادگری
Он ки то дасти карам густариш омад ба карам
آنکه تا دستِ کَرَمگُسْتَرَش آمد به کَرَم
Танг дастӣ накашидем з бесиму зарӣ
تنگدستی نکشیدیم ز بیسیم و زری
То фурӯғии хати он моҳи дурахшон сар зад
تا «فروغی»، خطِ آن ماهِ درخشان سر زد
Фориғами рӯзу шаб аз фитнаи даври қамарӣ
فارغم روز و شب از فتنهیِ دورِ قمری