Дилам ки бастаи таъаллуқ ба зулфи пурчинӣ

دلم که بسته تعلق به زلف پرچینی

Кабӯтарӣаст муъаллақ ба чанги шоҳинӣ

کبوتری است معلق به چنگ شاهینی

зи моҳи чордҳии рӯзгори ман сияҳ аст

ز ماه چاردهی روزگار من سیه است

Ки офтоби фалакро накарда тамкинӣ

که آفتاب فلک را نکرده تمکینی

Марои ниҳоят шодӣаст бо ту эй ғами дӯст

مرا نهایت شادی است با تو ای غم دوست

Ки дӯстдори қадиму надими деринӣ

که دوستدار قدیم و ندیم دیرینی

Сипеҳр бо ҳама бемеҳряш ба меҳр омад

سپهر با همه بی مهریش به مهر آمد

Ҳануз бо ман бе дили ту бар сари кинӣ

هنوز با من بی دل تو بر سر کینی

Ғамат кашида ба хӯни кофару мусулмон ро

غمت کشیده به خون کافر و مسلمان را

Ту ҷавр пеша надонам ки дар чаҳ ойинӣ

تو جور پیشه ندانم که در چه آیینی

Балои мардуми донои зи чашми фаттонӣ

بلای مردم دانا ز چشم فتانی

Каманди гардани дилҳо зи ҷаъди Мишкӣнӣ

کمند گردن دلها ز جعد مشکینی

Магари зи шоми фироқи ту итилоъӣ дошт

مگر ز شام فراق تو اطلاعی داشت

Ки дил ба субҳ висолат надошт таскинӣ

که دل به صبح وصالت نداشت تسکینی

Чигуна неши ту ушшоқи танг дил нахуранд

چگونه نیش تو عشاق تنگ دل نخورند

Ки соҳиби даҳани тангу лаъли нўшинӣ

که صاحب دهن تنگ و لعل نوشینی

Ҳамаи фидоӣ ту карданд ҷони ширин ро

همه فدای تو کردند جان شیرین را

Чаҳ шоҳидии ту ки беҳтари зи ҷони ширинӣ

چه شاهدی تو که بهتر ز جان شیرینی

Муошири ту зи гули гашти боғ мустағнӣ аст

معاشر تو ز گل گشت باغ مستغنی است

Ки бӯстони гулу навбаҳори насринӣ

که بوستان گل و نوبهار نسرینی

Ба саркашии ту эй гулбуни шукуфтаи хушам

به سرکشی تو ای گلبن شکفته خوشم

Ки бар гулат нарасад дасти ҳеҷ гули чинӣ

که بر گلت نرسد دست هیچ گل چینی

Шамоили ту ба ҳаддӣ расед дар хӯбӣ

شمایل تو به حدی رسید در خوبی

Ки қобили назари шоҳи Носириддинӣ

که قابل نظر شاه ناصرالدینی

Сари мулӯки аҷами молики хзоини ҷам

سر ملوک عجم مالک خزاین جم

Ки зар дареғ надорад зи ҳеҷ мискинӣ

که زر دریغ ندارد ز هیچ مسکینی

Қабои салтанаташро чунон бурӣдаи худоӣ

قبای سلطنتش را چنان بریده خدای

Ки ҳаст атласи гардуни зи доманаши чинӣ

که هست اطلس گردون ز دامنش چینی

Фурӯғии ин ҳамаи ширини каломи баҳр чаҳ шуд

فروغی این همه شیرین کلام بهر چه شد

Магар ки аз лаб хусрав шунида таҳсинӣ

مگر که از لب خسرو شنیده تحسینی