Макун ҳиҷоби вуҷӯдати либоси дебо ро

مکن حجاب وجودت لباس دیبا را

Ки нест ҳоҷати дебои вуҷӯди зебо ро

که نیست حاجت دیبا وجود زیبا را

Туро бараҳна дар оғӯш бояд овардан

تو را برهنه در آغوش باید آوردن

Гирифтӣ аз ҳамаи узвати муроди аъзо ро

گرفتی از همه عضوت مراد اعضا را

зи пой то ба сарат май макам чу нешикар

ز پای تا به سرت می‌مکم چو نیشکر

Ба дастам ар бисипоранд он сару по ро

به دستم ار بسپارند آن سر و پا را

Ҳануз аҳли сафои парда дар миён доранд

هنوز اهل صفا پرده در میان دارند

Биор соқии маҷлис май мусаффо ро

بیار ساقی مجلس می مصفا را

зи гиряи саҳарии гирди дида пок бишӯй

ز گریهٔ سحری گرد دیده پاک بشوی

Ки дар қадаҳнигарӣ хандаҳои саҳбо ро

که در قدح نگری خنده‌های صهبا را

Шабонаи ҷоми ҷаҳони байни зи дасти соқии гир

شبانه جام جهان‌بین ز دست ساقی گیر

Ки ошкор бибинӣ ниҳони фардо ро

که آشکار ببینی نهان فردا را

Чаҳ шуъла буд ки сар зад зи хаймаи Лайлӣ

چه شعله بود که سر زد ز خیمهٔ لیلی

Ки сӯхти хирмани маҷнӯни дашти паймо ро

که سوخت خرمن مجنون دشت‌پیما را

Камоли ҳасани вай аз чашми ман тамошо кун

کمال حسن وی از چشم من تماشا کن

Бибин зи дидаи Вомиқи ҷамоли узро ро

ببین ز دیدهٔ وامق جمال عذرا را

Дилаш ҳануз наомад ба пурсиши дили ман

دلش هنوز نیامد به پرسش دل من

Магар ба дилҳо нишнид роҳи дилҳо ро

مگر به دلها نشنید راه دلها را

Саҳари фиришта фаррух сиришта Эй дидам

سحر فرشتهٔ فرخ سرشته‌ای دیدم

Ки менавишт ба зари ин се байти ғро ро

که می‌نوشت به زر این سه بیت غرا را

Ситораи даргаи мавлуди шоҳи носрдин

ستاره درگه مولود شاه ناصردین

Гирифт домани иқболи маҳди улё ро

گرفت دامن اقبال مهد علیا را

Сутӯдаи пардаи нишинӣ ки фари мӯъҷиз ӯ

ستوده پرده نشینی که فر معجز او

Шикастаи ахтари парвизу тоҷи доро ро

شکسته اختر پرویز و تاج دارا را

Хуҷастаи кавкаби бахташ ба осмон ме гуфт

خجسته کوکب بختش به آسمان می‌گفت

Ки ман харидами хуршеди олами оро ро

که من خریدم خورشید عالم‌آرا را

Фурӯғии он маи тобандаи сӯии хештанам

فروغی آن مه تابنده سوی خویشتنم

Чунон кашид ки рухшандаи меҳри ҳрбо ро

چنان کشید که رخشنده مهر حربا را