Калакӣ ки сӯрати ман ва он дилрабо кашид
کلکی که صورت من و آن دلربا کشید
Афканди тарҳи даврӣ ва аз ҳам ҷудо кашид
افکند طرح دوری و از هم جدا کشید
Моро хаёли хати ту аз гиря боз дошт
ما را خیال خط تو از گریه باز داشت
Он сабза то дамид нам аз чашм мо кашид
آن سبزه تا دمید نم از چشم ما کشید
Ғайр аз кашӣдан ситамат нест кори мо
غیر از کشیدن ستمت نیست کار ما
Бингар ки кори мо зи ту охир куҷо кашид
بنگر که کار ما ز تو آخر کجا کشید
эй сангдил чаҳ шуд ки вафое наме кунӣ
ای سنگدل چه شد که وفایی نمی کنی
Бар бедилӣ ки баҳри ту чандин ҷафо кашид
بر بی دلی که بهر تو چندین جفا کشید
То ёфт раҳи бхок дарат сайли ашки мо
تا یافت ره بخاک درت سیل اشک ما
Зон раҳгузар дигар натавонист по кашид
زان رهگذر دگر نتوانست پا کشید
Майл шуъоъ дошт бкФи субҳи офтоб
میل شعاع داشت بکف صبح آفتاب
Гуё бичишам худ з дарат тўтё кашид
گویا بچشم خود ز درت توتیا کشید
эй гул ҳануз з дил бинагорӣ надода
ای گل هنوز ز دل بنگاری نداده
Кӣ огаҳӣ ки аз ту фузулӣ чҳо кашид
کی آگهی که از تو فضولی چها کشید