эй дил аз дидаи фузуни дидаи зи дили сӯии ту моил

ای دل از دیده فزون دیده ز دل سوی تو مایل

Дилам аз дидаи туро май талабад дидаам аз дил

دلم از دیده ترا می طلبد دیده ام از دل

Чаҳ аҷаби майли ту аз содагии мардуми чашм

چه عجب میل تو از سادگی مردم چشم

Ту балое чаҳ шиносанд турои мардуми ғофил

تو بلایی چه شناسند ترا مردم غافل

Нақш аз санг бшстн наравад чанд бгрим

نقش از سنگ بشستن نرود چند بگریم

Чу ситам ёфт рақам дар дилат аз гиря чаҳ ҳосил

چو ستم یافت رقم در دلت از گریه چه حاصل

Чу хати нома ки хоҳанд бишӯйанд зи ашкам

چو خط نامه که خواهند بشویند ز اشکم

Нашудаи маҳви дил аз дил нашавад нақши ту зоил

نشده محو دل از دل نشود نقش تو زایل

Олимии гиряи кунон бар ғами ман дар ғами ишқат

عالمی گریه کنان بر غم من در غم عشقت

Ман бидон шод ки гаштами бағами ишқи ту қойил

من بدان شاد که گشتم بغم عشق تو قایل

Нест дар силсилаҳои хами зулфати дили сӯзон

نیست در سلسله های خم زلفت دل سوزان

Ҳаст овехтаи қандили фурӯзони бслосл

هست آویخته قندیل فروزان بسلاسل

Нест дар даҳр касе қобили тамкини иқомат

نیست در دهر کسی قابل تمکین اقامت

Ҷузи фузулӣ ки сари кӯии турои сохтаи манзил

جز فضولی که سر کوی ترا ساخته منزل