То хати сабзи ту пайдо шуда бар оризи ол

تا خط سبز تو پیدا شده بر عارض آل

Оризат моҳ тамомӣаст миёни ду ҳилол

عارضت ماه تمامیست میان دو هلال

Бас ки дорад маи ман шиддати улфати брқиб

بس که دارد مه من شدت الفت برقیب

Берақибаш натавонам ки дар орми бхёл

بی رقیبش نتوانم که در آرم بخیال

Ба чаҳ таъбири таманнои висол ту кунам

به چه تعبیر تمنای وصال تو کنم

Ман ки он Зуҳра надорам ки барам номи висол

من که آن زهره ندارم که برم نام وصال

Рӯй бинмо ки фидоӣ ту шавам раҳ чаҳ шавад

روی بنما که فدای تو شوم ره چه شود

Ман кунам касби камол ва ту кунӣ арзи ҷамол

من کنم کسب کمال و تو کنی عرض جمال

Ҳоли ман аз ту хароб ва ту зи ман мустағнӣ

حال من از تو خراب و تو ز من مستغنی

Чу бапушам з ту пайдост чаҳ хоҳад шуд ҳол

چو بپوشم ز تو پیداست چه خواهد شد حال

Чун рахти гармии хуршед наме сӯзади дил

چون رخت گرمی خورشید نمی سوزد دل

Нест дилсӯзи изорӣ ки надорад хату хол

نیست دلسوز عذاری که ندارد خط و خال

Талаби васли худ эй маи зи фузулии матлаб

طلب وصل خود ای مه ز فضولی مطلب

Ки зи донои талаб васл маҳоласт маҳол

که ز دانا طلب وصل محالست محال