намедонам чаҳ бад кардам чаро ранҷид ёр аз ман

نمی دانم چه بد کردم چرا رنجید یار از من

Ки афканд аз назари бардошти чашми эътибор аз ман

که افکند از نظر برداشت چشم اعتبار از من

Магар аз хоксориҳоӣ ман карданд огоҳаш

مگر از خاکساریهای من کردند آگاهش

Ки бинишастаст бар ойӣнаи табъаши ғубор аз ман

که بنشستست بر آیینه طبعش غبار از من

Нсўдм бар кафи пои латифаши хори мижгон ро

نسودم بر کف پای لطیفش خار مژگان را

Чаҳ бошад мӯҷиб ранҷидан он гули изор аз ман

چه باشد موجب رنجیدن آن گل عذار از من

Азуи ин заҳри чашму чин абрӯ нест бе ваҷҳе

ازو این زهر چشم و چین ابرو نیست بی وجهی

Адои нохушӣ сар зад магар беихтиёр аз ман

ادای ناخوشی سر زد مگر بی اختیار از من

Занами сар бар замин ҳар ҷои рӯм чун оби зини ғусса

زنم سر بر زمین هر جا روم چون آب زین غصه

Ки доман мекашад он сарв мегирад канор аз ман

که دامن می کشد آن سرو می گیرد کنار از من

Бидодам ҷон накардам ёрро расвои бшрҳи ғам

بدادم جان نکردم یار را رسوا بشرح غم

Агар май буд маҷнӯни зинда май омухти кор аз ман

اگر می بود مجنون زنده می آموخت کار از من

Фузулӣ кард саргардони маро бе моҳи рухсорӣ

فضولی کرد سرگردان مرا بی ماه رخساری

намедонам чаҳ дар дил дошт даври рӯзгор аз ман

نمی‌دانم چه در دل داشت دور روزگار از من