Аз он рӯ дӯст медорам хати рухсори хубон ро
از آن رو دوست میدارم خط رخسار خوبان را
Ки баҳри улфати эшон сабаб донистаам он ро
که بهر الفت ایشان سبب دانستهام آن را
Ҷафоҳо мекашидам бандаи он хати мишкӣнам
جفاها میکشیدم بندهٔ آن خط مشکینم
Ки бар ман кард зоҳири садҳазорони лутфи пинҳон ро
که بر من کرد ظاهر صدهزاران لطف پنهان را
Кунун дил метавонад кард сайри боғи рухсораш
کنون دل میتواند کرد سِیْرِ باغ رخسارش
Ки пӯшеди он хати мишкӣни сари чоҳи занхдон ро
که پوشید آن خط مشکین سر چاه زنخدان را
Аз он хати мънбр ҳар сари мӯе забонӣ шуд
از آن خط معنبر هر سر مویی زبانی شد
Салоӣ хон васлаш дод дилҳои парешон ро
صلای خوان وصلش داد دلهای پریشان را
Наме сӯзади диламро бо ҷафо то гирди хати пайдо
نمیسوزد دلم را با جفا تا گرد خط پیدا
Шаб омад кард зоили гармии хуршеди рахшон ро
شب آمد کرد زایل گرمی خورشید رخشان را
зи хати мусҳафи рухсор ӯ эй дил машав ғофил
ز خط مصحف رخسار او ای دل مشو غافل
Гар ин ояти мусулмони сохтаи он номусулмон ро
گر این آیت مسلمان ساخته آن نامسلمان را
Фузулӣ нест ғайри хати рухсори парии рӯйон
فضولی نیست غیر خط رخسار پریرویان
Тилисмии кошно бо ҳар парӣ месозад инсон ро
طلسمی کآشنا با هر پری میسازد انسان را