Миёни сагу гурбаи шабӣ низо афтод
میان سگ و گربه شبی نزاع افتاد
Ба гурба гуфт саг эй косаи лӣси луқмаи шумор
به گربه گفت سگ ای کاسه لیس لقمه شمار
Туе ки нест турои бӯе аз тариқи адаб
تویی که نیست ترا بویی از طریق ادب
Туе ки нест турои ҷузи тариқи дуздии кор
تویی که نیست ترا جز طریق دزدی کار
намешавад ки касе луқмаи барад ба даҳан
نمی شود که کسی لقمه برد به دهن
Ки аз тамаъ набарӣ роҳаташ ба нолаи зор
که از طمع نبری راحتش به ناله زار
Чарост ин ҳамаи иззати туро ба ин ҳамаи айб
چراست این همه عزت ترا به این همه عیب
Ки май кашанди турои халқи муттасил ба канор
که می کشند ترا خلق متصل به کنار
Шарики хуоне ва ҳам хоби бистару болин
شریک خوانی و هم خواب بستر و بالین
Рафиқи маҷлису мақбул ҳар парии рухсор
رفیق مجلس و مقبول هر پری رخسار
Манам ки фоида ҳо мерасад зи ман шабу рӯз
منم که فایده ها می رسد ز من شب و روز
Ҳаросатаст марои шаби шиору рӯзи шикор
حراست است مرا شب شعار و روز شکار
Вафо шиор манасту адаби тариқаи ман
وفا شعار منست و ادب طریقه من
Бар остона маро манзиласт лайл ва наҳор
بر آستانه مرا منزلست لیل و نهار
Васила чист ки ту дохилӣ ва ман хориҷ
وسیله چیست که تو داخلی و من خارج
Ту гӯшт май хурӣу устихони ман аФгор
تو گوشت می خوری و استخوان من افگار
Гуноҳи ман чаҳ шуду вази ҳунар чаҳ ҳаст туро
گناه من چه شد و وز هنر چه هست ترا
Ки гуфтаанд турои тоҳиру марои мурдор
که گفته اند ترا طاهر و مرا مردار
Ба маҷлиси уламои ту анис ва ман аз давр
به مجلس علما تو انیس و من از دور
Ба маҳфили фузалои ту азизӣ ва ман хор
به محفل فضلا تو عزیزی و من خوار
з рӯй таъна чунин гуфт гурбаи хомӯш
ز روی طعنه چنین گفت گربه خاموش
Ки эй даранда бе зинҳор бади кирдор
که ای درنده بی زینهار بد کردار
Ба миҳмону гадои муттасили ҷадали дорӣ
به میهمان و گدا متصل جدل داری
Ба ҳар ғариби мудом аз ту мерасад озор
به هر غریب مدام از تو می رسد آزار
Ба хайри аҳли саодати ту май шӯии монеъ
به خیر اهل سعادت تو می شوی مانع
Бад-ӣни равиш ки туе коми дили умеди мадор
بدین روش که تویی کام دل امید مدار
Гумон мабар ки ба сарманзили муроди рисӣ
گمان مبر که به سرمنزل مراد رسی
Макун хаёл ки кардӣ зи умри бархӯрдор
مکن خیال که کردی ز عمر برخوردار