Биёи соқии он ҷавҳар бе бадал
بیا ساقی آن جوهر بی بدل
Ки дар нашоҳ ӯст файзи азал
که در نشاه اوست فیض ازل
Бмни даҳ ки файзии расонади маро
بمن ده که فیضی رساند مرا
Диҳад завқӣ аз ман сетанд маро
دهد ذوقی از من ستاند مرا
Биёи соқии он соғари пари шароб
بیا ساقی آن ساغر پر شراب
Нигини мурассаъи бёқўти ноб
نگین مرصع بیاقوت ناب
Бмни даҳ ки ман ҳам бони лаъл тар
بمن ده که من هم بآن لعل تر
Мурассаъ кунам чеҳраи ҳамчуи зар
مرصع کنم چهره همچو زر
Биёи соқии он мояи ъзу ҷоҳ
بیا ساقی آن مایه عز و جاه
Ки дарвешро мекунад подшоҳ
که درویش را می کند پادشاه
Бидиҳ то надонам ман бе наво
بده تا ندانم من بی نوا
Ки фарқ аз гадо чист то подшоҳ
که فرق از گدا چیست تا پادشاه
Чу завқии расонадии з май бар дилам
چو ذوقی رساندی ز می بر دلم
Баҷоами шашум гарм кун маҳфилам
بجام ششم گرم کن محفلم
Ки завқ аз шашум ншأаҳ гирад камол
که ذوق از ششم نشأه گیرد کمال
Далерӣ кунад дили бозҳори ҳол
دلیری کند دل باظهار حال