Расед номаи дилдори дӯшам аз Широз

رسید نامهٔ دلدار دوشم از شیراز

Давон гирифтам ва бӯседам ва намудем боз

دوان‌ گرفتم و بوسیدم و نمودم باز

Навишта буд марои к-эй муқӣм гашта ба рай

نوشته بود مرا کای مقیم‌ گشته به ری

Чаҳ рӯй дод ки дил барграфтӣ аз Широз

چه روی داد که دل برگرفتی از شیراز

Шунидаам ки ба рай шоҳидон шангуланд

شنیده‌ام ‌که به ری شاهدان شنگولند

Ҳамаи шикорӣу нахҷӣргиру сидондоз

همه شکاری و نخجیرگیر و صیدانداز

Ҳалок ҳастӣ қавмӣ ба чашмакони нижанд

هلاک هستی قومی به چشمکان نژند

Каманди хотири халқӣ ба зулфакони дароз

کمند خاطر خلقی به زلفکان دراز

Гумон барам ки бидон дилбарони супурдии дил

گمان برم که بدان دلبران سپردی دل

Дареғ аз он ҳамаи меҳру вафоу аҷзу ниёз

دریغ از آن همه مهر و وفا و عجز و نیاز

Ҳануз ғабғаби симини ман чу гӯии сифед

هنوز غبغب سیمین من چو گوی سفید

Муъаллақаст дар он зулфакони чавгони боз

معلق است در آن زلفکان چوگان‌باز

Ду мижа дорам ҳар як чу панҷаи ишоҳин

دو مژه دارم هر یک چو پنجهٔ یشاهین

Ду турра дорам ҳар як чу чнгли шаҳбоз

دو طره دارم هر یک چو چنگل شهباز

?ҳулло чаҳ шикваи даҳуми шарҳи ҳол худ банавис

هلا چه شکوه دهم شرح حال خود بنویس

Ки то куҷое ва чунӣ ва бо ки эй дмсоз

که تا کجایی و چونی و با که‌ای دمساز

Қалам гирифтаму бнўштмши ҷавоб ки ман

قلم ‌گرفتم و بنوشتمش جواب که من

На он касам ки дил дода аз ту гирами боз

نه آن ‌کسم‌ که دل داده از تو گیرم باز

Пас аз фироқ ки кардам басӣҷи роҳи Ироқ

پس از فراق‌ که‌ کردم بسیج راه عراق

Шудам савор бар он барқи сайр гардун тоз

شدم سوار بر آن برق‌سیر گردون‌تاز

Ба наъли асби нбштми басии тлолу вҳод

به نعل اسب نبشتم بسی تلال و وهاد

Ба коми Рахши супурдами басии нишебу фароз

به‌کام رخش سپردم بسی نشیب و فراز

Ба раии расидами пеш аз вусӯли мавкиби шоҳ

به ری رسیدم پیش از وصول موکب شاه

Табам гирифту танам зор шуд чу тори тароз

تبم گرفت و تنم زار شد چو تار طراز

Чу хусрав омад таб рафту гирд ғам бинишаст

چو خسرو ‌ آمد تب ‌رفت‌ و گرد غم بنشست

Замини супурдаму барадам ба тахти шоҳи ниёз

زمین سپردم و بردم به تخت شاه نیاز

Қасида хондам ва кард офарин ва дод сала

قصیده خواندم و کرد آفرین و داد صله

Ба хонаи омадам ва дар гушӯдаи бастами боз

به خانه آمدم و در گشوده بستم باز

Дилами зи ваҷд ту гуфтӣ ки мезанад ноқавс

دلم ز وجد تو گفتی‌ که می‌زند ناقوس

Танами зи рақс ту гуфтӣ ки мекунад парвоз

تنم ز رقص تو گفتی‌ که می‌کند پرواز

ҲриФкии ду се ҷустами зарифу нодарраи гӯй

حریفکی دو سه جستم ظریف و نادره‌گوی

Шудам ба хилват ва дарро ба рӯй карда фароз

شدم به خلوت و در را به روی‌ کرده فراز

Ба паҳлавии санамии моҳи дилбарони чгл

به پهلوی صنمی ماه دلبران چگل

Ба мшкмўими қамарии шоҳи шоҳидони тароз

به مشکمویم قمری شاه شاهدان طراز

Гуҳӣ ба соқӣ гуфтам ки хез ва май бгсор

گهی به ساقی ‌گفتم‌ که خیز و می بگسار

Гуҳӣ ба мутриб гуфтам ту низ не бинавоз

گهی به مطرب‌ گفتم تو نیز نی بنواز

Ду чашмам аз тарафии маҳви монда дар соқӣ

دو چشمم از طرفی محو مانده در ساقی

Ду гӯшам аз ҷиҳатии бози монда дар овоз

دو گوشم از جهتی باز مانده در آواز

Надода ҳодиса ӣӣ рӯи зи ҳеҷ сӯии магар

نداده حادثه‌یی رو ز هیچ سوی مگر

Шаби гузашта ки кардем сози ъушрати соз

شب‌ گذشته‌ که‌ کردیم ساز عشرت ساز

Миёни мутриб ва соқӣ фитод арбада Эй

میان مطرب و ساقی فتاد عربده‌ای

Чунон ки кор ба силӣ кашиду нохуну газ

چنان که ‌کار به سیلی ‌کشید و ناخن و گاز

Ба фарқи мутриби соқии шикасти шиша май

به فرق مطرب ساقی شکست شیشهٔ می

Ба китфи соқӣ мутриб навохт дастаи соз

به کتف ساقی مطرب نواخت دستهٔ ساز

Чаҳ гуфт соқии гуфтои куҷо ҷамол манаст

چه گفت ساقی گفتا کجا جمال منست

Чаҳ ҳоҷатаст ки мутриби ҳаме з над Шаҳноз

چه حاجتست ‌که مطرب همی ز‌ند شهناز

Чаҳ гуфт мутриб гФтокҷо навой манаст

چه‌گفت مطرب‌گفتاکجا نوای منست

Чаҳ лозимаст ки соқӣ ҳаме диҳад бгмоз

چه لازمست‌ که ساقی همی دهد بگماز

Ман аз карона ӣ маҷлис ба ҳар ду бонг задам

من از کرانه ی مجلس به هر دو بانگ زدم

Бидон масоба ки сарҳанги тарк бо сарбоз

بدان مثابه که سرهنگ ترک با سرباز

Ҳаме чаҳ гуфтам гуфтам ки бо фазойили ман

همی چه‌گفتم‌گفتم‌که با فضایل من

На бода бояду соқӣ на раваду рўднўоз

نه باده باید و ساقی نه رود و رودنواز

Ки ногуҳи он як далқам гирифт ва ин як ҳалқ

که ناگه آن یک دلقم‌ گرفت و این یک حلق

Кшонм аз ду тарафи к-эии ҳарифи шоҳдбоз

کشانم از دو طرف ‌کای حریف شاهدباز

Ту он касе ки ба зиштӣ туро зананд мисл

تو آن ‌کسی‌که به زشتی ترا زنند مثل

Туро чаҳ шуд ки ба ҳар нозанини фурӯшии ноз

تو را چه شد که به هر نازنین فروشی ناز

Туро ки гуфт ки бо рӯй зишти рухи бФрўз

تو را که گفت که با روی زشت رخ بفروز

Туро ки гуфт ки бо пушти гўжи қади бФроз

تو را که ‌گفت ‌که با پشت‌ گوژ قد بفراز

Зкбри нармаки нармак ба ҳар ду хандидам

زکبر نرمک نرمک به هر دو خندیدم

Чунонкӣ хандад аз нози дилбарии танноз

چنانکه خندد از ناز دلبری طناز

Бигуфтам ар бишносед ном ва кунят ман

بگفتم ار بشناسید نام و کنیت من

Ба хоки мақдами ман брнҳид рӯй ниёз

به خاک مقدم من برنهید روی نیاز

АбўолФзоили Қоонӣ ар шнидстид

ابوالفضایل قاآنی ار شنیدستید

Манам ки ҳастам маддоҳи шоҳи бандаи навоз

منم‌ که هستم مداح شاه بنده‌ نواز

Чу ин бигуфтам соқӣ гирифт зулф ба чанг

چو این بگفتم ساقی‌‌ گرفت زلف به چنگ

Ки баҳри хотири ман эй адиби нуктаи тароз

که بهر خاطر من ای ادیب نکته ‌طراز

Баҳор омад ва дай рафту рӯз ид расед

بهار آمد و دی رفت و روز عید رسید

Барои таҳнияти шаҳи яке чакома бисоз

برای تهنیت شه یکی چکامه بساز

Бабри нахусти сӯии хоҷа бузург бихон

ببر نخست سوی خواجهٔ بزرگ بخوان

Агар қабул вай уфтад бигир хати ҷавоз

اگر قبول وی افتد بگیر خط جواز

Сипас ба ҳазрати шоҳ ҷавон бихон ва бихоҳ

سپس به‌حضرت شاه‌جوان بخوان و بخواه

Яке нишон ки ба ҳар кишварат кунад эъзоз

یکی نشان‌ که به هر کشورت ‌کند اعزاز

Қалам гирифтаму баъд аз сипоси борхдоӣ

قلم ‌گرفتم و بعد از سپاس بارخدای

Ба мадҳи шоҳ бад-инсон шудам сухани пардоз

به مدح شاه بدینسان شدم سخن‌پرداز

Ки фари хуҷастаи бмоноди рӯзгори дароз

که فر خجسته بماناد روزگار دراز

Хдоигони слотъни хдиўи хасми гудоз

خدایگان سلاطعن خدیو خصم‌گداز

Сипеҳри маҷди Муҳамади шаҳи офтоби мулӯк

سپهر مجد محمّد شه آفتاب ملوک

Ки чеҳри шоҳиди давлати азуи гирифтаи тароз

که چهر شاهد دولت ازو گرفته طراز

Қазо ба қабзаи ҳукмаш чу нохуни андари мушт

قضا به قبضهٔ حکمش چو ناخن اندر مشت

Қадар ба чнгли қаҳраш чу оҳани андари газ

قدر به چنگل قهرش چو آهن اندر گاز

Ба ҳзм гуфта қавонини ақлро бурҳон

به حزم‌گفته قوانین عقل را برهان

Ба ҷӯад карда мўоъиди озрои анҷоз

به جود کرده مواعید آزرا انجاز

Ба ҳмркобии ҷўдш гадо шавад парвиз

به همرکابی جودش‌ گدا شود پرویز

Ба ҳам анонеи азмаш замин кунад парвоз

به هم عنانی عزمش زمین‌کند پرواز

Зиҳӣ ба мартабат аз ҳар чаҳ подшои махсӯс

زهی به مرتبت از هر چه پادشا مخصوص

Зиҳӣ ба манзалат аз ҳарчӣ ҳукмрони мумтоз

زهی به منزلت از هرچه حکمران ممتاز

Ба ҷои нуқтаи зи калакаши Фрўчкди парвин

به جای نقطه ز کلکش فروچکد پروین

Ба ҷои нуктаи зи лафзаш аён шавад эъҷоз

به جای نکته ز لفظش عیان شود اعجاز

Саманди азми турои Авни кирдигори муайян

سمند عزم ترا عون‌ کردگار معین

Арӯси бахти турои малики рӯзгори ҷҳоз

عروس بخت ترا ملک روزگار جهاز

Ба аз адолат маҳзаст бар адуии ту зулм

به از عدالت محضست بر عدوی تو ظلم

Ба аз қаноат сарфаст бо влои ту оз

به از قناعت صرفست با ولای تو آز

Марои зи адли ту шоҳо ҳикоятӣаст аҷиб

مرا ز عدل تو شاها حکایتی است عجیب

Ки каси надида ва нашида дар Ироқу ҳиҷоз

که‌کس ندیده و نشیده در عراق و حجاز

Шунидаам ки даду дому ваҳшу тайри ҳама

شنیده‌ام‌که دد و دام و وحش و طیر همه

Шикастаи бол ба кунҷӣ нишастаанд фароз

شکسته‌بال به‌کنجی نشسته‌اند فراز

Фиканда машваратӣ дар миёна вагуфтанд

فکنده مشورتی در میانه وگفتند

Ки адли шоҳ дар ризқ мо бибаст фароз

که عدل شاه در رزق ما ببست فراز

На сайд бинад юз ва на мяш ёбад грк

نه صید بیند یوز و نه میش یابد گرک

На Ғарми дарди шер ва на Кебек гирад боз

نه غرم دَرَد شیر و نه‌ کبک ‌گیرد باز

Тамом ҷонварему зи ризқи ногзрим

تمام جانوریم و ز رزق ناگزریم

Яке бибояд бо икдгр шудани анбоз

یکی بباید با یکدگر شدن انباز

Ба расми одамиёни ҳаркадомӣ аз тарафӣ

به رسم آدمیان هرکدامی از طرفی

зи баҳр ризқ намоем пеша ӣӣ оғоз

ز بهر رزق نماییم پیشه‌یی آغاز

зи баҳри касби яке гавҳари орад аз Аммон

ز بهر کسب یکی ‌گوهر آرد از عمان

зи баҳри суди яке шукри орад аз Аҳвоз

ز بهر سود یکی شکر آرد از اهواز

Паланг аз мижа сӯзан кунад шавад хайёт

پلنگ از مژه سوزن‌کند شود خیاط

Ҳужабр аз мӯ дибокнд шавад бзоз

هژبر از مو دیباکند شود بزاز

Уқоби оради хрмҳраҳ аз савоҳилу баҳр

عقاب آرد خرمهره از سواحل و بحر

Дукони кушояд ва дар шаҳрҳо шавад хроз

دکان‌گشاید و در شهرها شود خراز

Ба рӯзгори ту чун назм ҷонварон инаст

به روزگار تو چون نظم جانوران اینست

зи назми одамиёни хсрўо чаҳ ронами роз

ز نظم آدمیان خسروا چه رانم راز

Шҳо Сикандари рӯмӣ ба ҳмънонии Хизр

شها سکندر رومی به همعنانی خضر

Нахурда оби бақои бози монда аз так ва тоз

نخورده آب بقا باز مانده از تک و تاز

Туе Сикандару хзристи пешкор дарат

تویی سکندر و خضریست پیشکار درت

Ки оби Хизр ба хокаши ниҳода рӯй ниёз

که آب خضر به خاکش نهاده روی نیاز

Фириштаи ист аён гашта дар лабони башар

فرشته‌ایست عیان‌گشته در لبان بشر

Ҳақиқатӣаст баровардаи сари зи ҷайби муҷоз

حقیقتی است برآورده سر ز جیب مجاز

Ба мадҳ ӯ ҳамаи итноби хўштрст арча

به مدح او همه اطناب خوشترست ارچه

Мисли бўдкаҳи зи итноб ба буд эҷоз

مثل بودکه ز اطناب به بود ایجاز

Шҳншҳои маликои шарҳ ҳол маълумаст

شهنشها ملکا شرح حال معلومست

Аз инки қофия шъркрдаҳам Широз

از اینکه قافیهٔ شعرکرده‌ام شیراز

Ба раии иқомати ман сахт мушкиласт аз онк

به ری اقامت من سخت مشکلست از آنک

На мол дораму манзил на барг дораму соз

نه مال دارم و منزل نه برگ دارم و ساز

Кам аз чордаҳ моҳаст то зи ранҷи сафар

کم از چارده ماهست تا ز رنج سفر

Чу моҳи як шабаҳ ҳастам қарини караму гудоз

چو ماه یک‌شبه هستم قرین ‌کرم و گداز

Гар аз ту оқибати кор ман шавад Маҳмӯд

گر از تو عاقبت ‌کار من شود محمود

зи ғам ба хеш напечам ҳаме чу зулфи Аёз

ز غم به خویش نپیچم همی چو زلف ایاز

Сазад ки ротбаҳ рутба ам бифзое

سزد که راتبهٔ رتبه‌ام بیفزایی

Ба рағми ахтари носозу ҳосиди ғаммоз

به رغم اختر ناساز و حاسد غمّاز

зи мори гурзаи ҳаме то буд салим ?илем

ز مار گَرزه همی تا بود سلیم الیم

зи шери шарза ҳаме тозанд гурези гуроз

ز شیر شرزه همی تازند گریز گراز

Чунонкии сарви биболад ба боғи малики бибол

چنانکه سرو ببالد به باغ ملک ببال

Чунонкӣ моҳ бинозад ба чарх маҷд биноз

چنانکه ماه بنازد به چرخ مجد بناز