Субҳдам каз ҷониби машриқи баромади офтоб

صبحدم کز جانب مشرق برآمد آفتاب

Ҳамчуи бахти Подшаҳ бедор шуд чашмами зи хоб

همچو بخت پادشه بیدار شد چشمم ز خواب

Рӯй ношстаҳи зи дами ҷомии мӣӣ каз буи ӯ

روی ناشسته ز دم جامی مئی کز بوی او

То лаб гӯр ояд аз лабҳои ман буии шароб

تا لب گور آید از لبهای من بوی شراب

Зон мӣӣ каз ҷоми Кайхусрави ҷаҳони байн тар шавад

زان مئی کز جام کیخسرو جهان‌بین‌تر شود

Гар чакад як қатраи дркосаҳи сари афросйоб

گر چکد یک قطره درکاسهٔ سر افراسیاب

Чун димоғам тар шуд аз медидам азтрФи шимол

چون دماغم تر شد از می دیدم ازطرف شمال

Тофт хуршедӣ ки шуд хуршед зу дар эҳтиҷоб

تافت خورشیدی که شد خورشید زو در احتجاب

Чашм молидаам ки мастам ё ба хўобстм ҳануз

چشم مالیدم که مستم یا به خوابستم هنوز

Вондрини маънии дилам дар шубҳаи ҷон дар артёб

واندرین معنی دلم در شبهه جان در ارتیاب

Гоҳ мегуфтам ки хуршедаст гардуни рози асл

گاه میگفتم که خورشید است گردون راز اصل

Боз мегуфтам на ҳошои анаи шиӣии ъҷоб

باز می‌گفتم نه حاشا انه شیئی عجاب

Боз мегуфтам шнидстми зи мисатони пеши азин

باز میگفتم شنیدستم ز مستان پیش ازین

Кодмии якро ду бинад чун фузуни нӯшади шароб

کادمی یک را دو بیند چون فزون نوشد شراب

Ман дарин ҳайрат ки омад моҳи ман ногуҳи з дар

من درین حیرت که آمد ماه من ناگه ز در

Бо ду чашмии ҳамчуи ҳоли ошиқони масту хароб

با دو چشمی همچو حال عاشقان مست و خراب

Дар сар ҳар мӯии мижгонаши дусади таркиши хаданг

در سر هر موی مژگانش دوصد ترکش خدنگ

Дар хам ҳар тори гесуяши ду сад чини машки ноб

در خم هر تار گیسویش دو صد چین مشک ناب

Рӯй ӯро сад хазинаи ҳасан дар ҳар обу ранг

روی او را صد خزینه حسن در هر آب و رنگ

Мӯӣ ӯро сад саҳифаи саҳар дар ҳар печу тоб

موی او را صد صحیفه سحر در هر پیچ و تاب

Об рӯйу тоби мӯии баради обу тоби ман

آب روی و تاب موی برد آب و تاب من

Ин зи ҷонами бардаи об ва он зи ҷисмами бардаи тоб

این ز جانم برده آب و آن ز جسمم برده تاب

Чеҳраши андари зулфи ҳурии хуфта дар домони дев

چهرش اندر زلف حوری خفته در دامان دیو

ё ҳўосли бачаеи осӯда дар пари ғроб

یا حواصل بچهیی آسوده در پر غراب

Ҳурмати гесуу чашмашро бар онстм ки нест

حرمت گیسو و چشمش را بر آنستم که نیست

Ҳеҷ кофарро азоб ва ҳеҷ соҳирро уқоб

هیچ کافر را عذاب و هیچ ساحر را عقاب

Чун маро зон гӯна пжмон дид ғжмон шуд зи хашм

چون مرا زان گونه پژمان دید غژمان شد ز خشم

Чанг пеш оварад тогўшм бимолад чун рубоб

چنگ پیش آورد تاگوشم بمالد چون رباب

Гуфтам эй ғулмони дунё эй биҳишти хокён

گفتم ای غلمان دنیا ای بهشت خاکیان

эй ситораи нозпрўр эй фиришта бе ниқоб

ای ستارهٔ نازپرور ای فرشتهٔ بی‌نقاب

эй ду рангини оризати дорулхилофаи дилбарӣ

ای دو رنگین عارضت دارالخلافهٔ دلبری

Ваии ду мишкӣни турраи ?ути дороломораҳи моҳтоб

وی دو مشکین طره‌ات دارالامارهٔ ماهتاب

Меҳри нўроФрўзи имрӯзам дувумӣ ояд ба чашм

مهر نورافروز امروزم دومی آید به چشم

Ман дарин аҳволи ҳайрони коҳўлстм ё мсоб

من درین احوال حیران‌کاحولستم یا مُصاب

Офтобӣ аз шимол ояд ба чашмами ҷилва гар

آفتابی از شمال آید به چشمم جلوه‌گر

ВоФтобии дигари андари машриқ аз ваии нури тоб

وافتابی دیگر اندر مشرق از وی نور تاب

Нарми нармаки ханда ӣӣ фармуду бурқаъи бргшўд

نرم نرمک خنده‌یی فرمود و برقع برگشود

Гуфт моро ҳам нзркн то се бинии офтоб

گفت ما را هم نظرکن تا سه بینی آفتاب

Гуфтам аз ҳоли туу хуршеди гардуни воқифам

گفتم از حال تو و خورشید گردون واقفم

Инак ин хуршед дигар чист гуфто дар ҷавоб

اینک این خورشید دیگر چیست گفتا در جواب

Офтобӣ каз шимоли порси бинии ҷилва гар

آفتابی ‌کز شمال پارس بینی جلوه‌گر

Ҳаст ташрифи валиаҳди шаҳи молики рқоб

هست تشریف ولیعهد شه مالک رقاب

БўолмзФри Носириддин каз насими афв ӯ

بوالمظفر ناصرالدّین‌ کز نسیم عفو او

Дар даҳони мори трёқ аҷал гардад луоб

در دهان مار تریاق اجل‌گردد لعاب

Гуфтам он ташрифи оранди азкҷогФтои зи рай

گفتم آن تشریف آرند ازکجاگفتا ز ری

Гуфтам аз бҳркаҳ гуфт аз баҳри миркомёб

گفتم از بهرکه‌گفت از بهر میرکامیاب

Ҷонфишони сарбози шоҳаншаҳи ҳусайни хон онкӣ ҳаст

جانفشان سرباز شاهنشه حسین‌خان آنکه هست

Нохуну теғаши зи хӯни душманони шаҳи хизоб

ناخن و تیغش ز خون دشمنان شه خضاب

Гуфтам аз саъй ки соҳиби ихтиёри малики ҷам

گفتم از سعی‌که صاحب اختیار ملک جم

Шуд чунин вофири насиб ва шуд чунон комили нассоб

شد چنین وافر نصیب و شد چنان‌کامل نصاب

Гуфт аз фазли ъмими хоҷаи аъзам ки ҳаст

گفت از فضل عمیم خواجهٔ اعظم‌ که هست

Ҳарчӣ дар ҳастӣ қшўру ҷисму ҷони аўлбоб

هرچه در هستی قشور و جسم و جان اولباب

Гуфтам оё таҳниятро ҳеҷ гӯям гуфт на

گفتم آیا تهنیت را هیچ‌گویم‌گفت نه

Гуфт ман хуштар ки дӯшам зосмон омад хитоб

گفت من خوشتر که دوشم زآسمان آمد خطاب

Каз барои таҳнияти фардои зи қавли қудсён

کز برای تهنیت فردا ز قول قدسیان

Дар ҳузур мейр бархон ин қасидаи мустатоб

در حضور میر برخوان این قصیدهٔ مستطاب