Шаби гузашта ки офоқро злом гирифт
شب گذشته که آفاق را ظلام گرفت
зи тоби меҳри замини ранги сим хом гирифт
ز تاب مهر زمین رنگ سیم خام گرفت
Шаби сиёҳ чу дуздони зи тоби моҳи каманд
شب سیاه چو دزدان ز تاب ماهکمند
Ба кафи ниҳоду ҳамеи роҳи кӯй ва бом гирифт
به کف نهاد و همی راه کوی و بام گرفت
Ба соми рӯзи магари Нӯҳи даҳр нафрин кард
به سام روز مگر نوح دهر نفرین کرد
Ки бе ҷинояти маъҳуди ранг ҳом гирифт
که بیجنایت معهود رنگ حامگرفت
Чу ёам гашти ҷаддии ғарқа чун талиъаи субҳ
چو یام گشت جدیغرقه چون طلیعهٔ صبح
Намӯд ҷўдии вкштӣ бар ӯ мақом гирифт
نمود جودی وکشتی بر او مقام گرفت
Таноби Фкртми он шаби чунон дароз кашид
طناب فکرتم آن شب چنان دراز کشید
Ки рафту домани ин нилгун хайём гирифт
که رفت و دامن این نیلگون خیام گرفت
Хаёли халқи паямбари гузашт дар дили ман
خیال خلق پیمبر گذشت در دل من
зи буии машки марои атса дар машом гирифт
ز بوی مشک مرا عطسه در مشام گرفت
Барроқи мадҳи чунон гарм бар фалак ронадам
براق مدح چنان گرم بر فلک راندم
Ки тавсанамро рӯҳи алқудс лаҷом гирифт
که توسنم را روحالقدس لجامگرفت
Саманди калаки ман он сӯи тарки з арш чамед
سمند کلک من آن سو ترک ز عرش چمید
Чу дар миёни се ангушти ман хиром гирифт
چو در میان سه انگشت من خرام گرفت
Фазои хилвати дил танг шуд ба шоҳиди рӯи ҳ
فضای خلوت دل تنگ شد به شاهد روح
зи бас ки айшу тараб бар дилам зҳом гирифт
ز بس که عیش و طرب بر دلم زحام گرفت
Чу бахт хоҷа бидам то саҳари ҳони бедор
چو بخت خواجه بدم تا سحرهان بیدار
Чу бахташи ин сифат аз ҳӣ лоём гирифт
چو بختش این صفت از حی لایام گرفت
Саҳар чу рехти фалаки гирди меҳрҳои сипед
سحر چو ریخت فلک گرد مهرهای سپید
зи ҷурми хур ба сари ин ташт зрдФом гирифт
ز جرم خور به سر این طشت زردفام گرفت
з ки баромади он сурхи шери зарди мижа
ز کُه برآمد آن سرخ شیر زرد مژه
Ки гирди худ мижаи зарди худ кном гирифт
که گرد خود مژهٔ زرد خود کنام گرفت
Сипед оҳўкон хӯрд он ғазанфари сурх
سپید آهوکان خورد آن غضنفر سرخ
Ки зарди мижа ӯ тезӣ аз саҳҳом гирифт
که زرد مژهٔ او تیزی از سهام گرفت
Чу соидон бигирифт он сипеди тоиркон
چو صایدان بگرفت آن سپید طایرکان
Чу бар китфи зрснҳои зард давом гирифт
چو بر کتف زرسنهای زرد دوام گرفت
Бутам чу Юсуф мисрӣ раседу нили хаташ
بتم چو یوسف مصری رسید و نیل خطش
Саводи хиттаи рай дар савод шом гирифт
سواد خطهٔ ری در سواد شامگرفت
Муҳими зи абрӯи оҳихти теғу меҳр аз нур
مَهَم ز ابرو آهیخت تیغ و مهر از نور
Аз ин ду теғ надонам ҷаҳон кадом гирифт
از این دو تیغ ندانم جهان کدام گرفت
Ба моҳ чеҳра парешед туррагони сиёҳ
به ماه چهره پریشید طُرَگان سیاه
Дубора шаб шуду офоқро злом гирифт
دوباره شب شد و آفاق را ظلامگرفت
Чу боз чеҳра намӯд аз миёни чанбари зулф
چو باز چهره نمود از میان چنبر زلف
зи ранги талъат ӯ шоми ранг бом гирифт
ز رنگ طلعت او شام رنگ بام گرفت
Дилам ба зулфи вай аз ҳртрФ ки рӯй намӯд
دلم به زلف وی از هرطرف که روی نمود
Сиёҳии шаби ялдои варо зимом гирифт
سیاهی شب یلدا ورا زمامگرفت
Суҳайл гуфтӣ аз осмони давид ба зер
سهیل گفتی از آسمان دوید به زیر
Ба ҷои бодаи гулранг ҷобаҷоам гирифт
به جای بادهٔگلرنگ جابجامگرفت
Чунин шароб ба шухии чунон ҳаром буд
چنین شراب به شوخی چنان حرام بود
Савоб кард ки сӯфӣ ба мо ҳаром гирифт
صواب کرد که صوفی به ما حرام گرفت
Чу масти гашту зи ҷои ҷуст ва бӯса дод бутам
چو مست گشت و ز جا جست و بوسه داد بُتم
Лабами шамеми гулу накҳат мудом гирифт
لبم شمیم گل و نکهت مدام گرفت
Чаҳ гуфт гуфт ки ҳар лаб ки мадҳ хоҷа кунад
چه گفت گفت که هر لب که مدح خواجه کند
Бибоядаш зи лаби с ба бӯса ком гирифт
ببایدش ز لب س به بوسهکامگرفت
Ямини миллати исломи ҳоҷии оқосӣ
یمین ملت اسلام حاجی آقاسی
Ки оФриши азуи шуҳраи гашт ва ном гирифт
که آفریش ازو شهرهگشت و نامگرفت
зи шавқи васл вайаст инки маънӣ аз оғоз
ز شوق وصل وی است اینکه معنی از آغاز
з арш омаду пайванд бо калом гирифт
ز عرش آمد و پیوند با کلام گرفت
Адуии срдмзоҷш чу санг сахт диласт
عدوی سردمزاجش چو سنگ سخت دلست
Чу об каз хунакии маънӣ жхом гирифт
چو آبکز خنکی معنی ژخامگرفت
зи пуртӯй ки замираш фиканд чун хуршед
ز پرتوی که ضمیرش فکند چون خورشید
Ба як ишораи змёу замон тамом гирифт
به یک اشاره زمیا و زمان تمام گرفت
Ба назми давлату дайни калаки ри а чу басти камар
به نظم دولت و دین کلک را چو بست کمر
Ҳисоми Подшаҳони ҷой дар ниёам гирифт
حسام پادشهان جای در نیامگرفت
Балӣ чаро нарав ди теғи сафдарон ба ниёам
بلی چرا نرود تیغ صفدران به نیام
Ки калак ӯ ду ҷаҳонро ба як паём гирифт
که کلک او دو جهان را به یک پیام گرفت
Низоми давлат шаҳ кард ҷони нисорӣ ро
نظام دولت شه کرد جاننثاری را
Ки давлати малик аз тоъаташ низом гирифт
که دولت ملک از طاعتش نظام گرفت
Ҳамин низоми з хоҷааст чун ба ҳақ нигарӣ
همین نظام ز خواجه است چون به حق نگری
Ки хоҷа гирад агар кишварӣ ғулом гирифт
که خواجه گیرد اگر کشوری غلام گرفت
Бад аз шикваи манӯчеҳри фари соми савор
بد از شکوه منوچهر فرِّ سام سوار
Ки ҳам ба неруӣ ӯ буд ҳар чаҳ сом гирифт
که هم به نیروی او بود هر چه سام گرفت
На аз ғмом агар қатра ӣӣ ба баҳр чакад
نه از غمام اگر قطرهیی به بحر چکد
Буд зи файзии коўли азу ғмом гирифт
بود ز فیضی کاول ازو غمام گرفت
Зафари даврони зи ясору яминаш каз тоъат
ظفر دوران ز یسار و یمینشکز طاعت
зи хоҷаи хотами лаъли вази шаҳ ҳисом гирифт
ز خواجه خاتم لعل وز شه حسام گرفت
Аё фириштаи гуҳари хоҷа ӣӣ ки қурби туро
ایا فرشته گهر خواجهیی که قرب ترا
Қабули ҳақи сабаби файзи мустадомгар Фт
قبول حق سبب فیض مستدام گرفت
Наими зоҳиру ботин ки ҳаст ҳастӣ ро
نعیم ظاهر و باطن که هست هستی را
Нахусти рӯзи зи як ҳиммати ту вомгар Фт
نخست روز ز یک همت تو وامگرفت
Ҳрони ҷанин ки занад меҳри меҳри ту ба ҷабин
هرآن جنین که زند مهر مهر تو به جبین
зи ҳақи нишони саодат ба батн моам гирифт
ز حق نشان سعادت به بطن مام گرفت
Нахусти рӯз ки шуд дасти давлати ту дароз
نخست روز که شد دست دولت تو دراز
зи пешгоҳи азали доман қиём гирифт
ز پیشگاه ازل دامن قیام گرفت
ҲамН на давлат эй рон низом ёфт зи ти р
همن نه دولت ایران نظام یافت ز تر
Ки малик рӯй замин аз ту интизом гирифт
که ملک روی زمین از تو انتظام گرفت
Ба баҳри мадҳи ту то ғӯта зад ба сидқи дилам
به بحر مدح تو تا غوطه زد به صدق دلم
Басони силки гуҳари назмам инсиҷом гирифт
بسان سلک گهر نظمم انسجام گرفت
Давоми давлат ту хоҳам аз ҷаҳон гарчи
دوام دولت تو خواهم از جهان گرچه
Ҷаҳони зи тақвияти давлатат давом гирифт
جهان ز تقویت دولتت دوامگرفت
Ба эҳтишоми ту ҳамвора чархи ҷҳдкнон
به احتشام تو همواره چرخ جهدکنان
Агар чаҳ чархи зи ҷаҳди ту эҳтишом гирифт
اگر چه چرخ ز جهد تو احتشام گرفت