Туро расмаст аввали дилрабое

تو را رسم‌ست اول دل‌ربایی

Нахустин меҳру охир бе вафое

نخستین مهر و آخر بی‌‌وفایی

Дар аввал май намоеи донаи хол

در اول می‌نمایی دانهٔ خال

Дар охири доми гесу май гушойӣ

در آخر دام گیسو می‌گشایی

Чу кӯтаҳ менамӯдӣ зулф гуфтам

چو کوته می‌نمودی زلف گفتم

Яқин кӯтаҳ шавад шоми ҷудоӣ

«یقین کوته شود شام جدایی»

Надонистам каманди толеъи ман

ندانستم کمند طالع من

зи бом васл ёбад норасоӣ

ز بام وصل یابد نارسایی

Барон будам ки аз оҳан кунам дил

بر آن بودم که از آهن کنم دل

Надонистам ки ту оҳани рибоӣ

ندانستم که تو آهن‌ربایی

Ман он рӯз аз хиради бегонаи гаштам

من آن روز از خرد بیگانه گشتم

Ки бо ишқи тўкрдми ошноӣ

که با عشق تو کردم آشنایی

Напиндорам ки бошад то дами марг

نپندارم که باشد تا دم مرگ

Гирифтори муҳаббатро раҳоӣ

گرفتار محبت را رهایی

Марои шоҳии чунон лиззат набахшад

مرا شاهی چنان لذت نبخشد

Ки андари кӯии маи рӯйони гадоӣ

که اندر کوی مه‌رویان گدایی

Саҳари ҷонами баромад бе ту аз лаб

سحر جانم برآمد بی‌تو از لب

Гумони барадами туе аз дар даройӣ

گمان بردم تویی از در درآیی

Чу дидам ҷони маҳзун буд гуфтам

چو دیدم جان محزون بود گفتم

Бирав донам ки бе ҷонони нпоиӣ

«برو، دانم که بی‌جانان نپایی»