Хомӯшии мо гашти бдомўз , батон ро
خاموشی ما گشت بدآموز، بتان را
Зини пеш вагар на асарӣ буд , фиғон ро
زین پیش وگر نه اثری بود، فغان را
Миннати каши таъсири вФоиим , ки охир
منت کش تأثیر وفاییم، که آخر
Ин шеваи аёни сохт , айёри дгарон ро
این شیوه عیان ساخت، عیار دگران را
Дар табъи баҳори ин ҳамаи ошуфтагӣ аз чист ?
در طبع بهار این همه آشفتگی از چیست؟
Гӯйӣ ки дил аз бими ту хӯн гашта хазон ро
گویی که دل از بیم تو خون گشته خزان را
Мӯе ки бурун номдаҳ бошад чаҳ намояд ?
مویی که برون نامده باشد چه نماید؟
Беҳуда дар андом ту ҷустем , миён ро
بیهوده در اندام تو جستیم، میان را
Тоқат натавонист ба ҳангома тараф шуд
طاقت نتوانست به هنگامه طرف شد
Додем ба дасти ғамат аз нола , Аннан ро
دادیم به دست غمت از ناله، عنان را
То шоҳиди розат ба хамӯшӣ шудаи расво
تا شاهد رازت به خموشی شده رسوا
Чун парда ба рухсори Фрўҳшт , баён ро
چون پرده به رخسار فروهشت، بیان را
Дар машраби бедоди ту хӯнам , ме нобаст
در مشرب بیداد تو خونم، می نابست
Каз завқ ба хамёзаи дроФгндаҳи камон ро
کز ذوق به خمیازه درافگنده کمان را
Дар тоъатёни фаррух ва бар ъшртёни саҳл
در طاعتیان فرخ و بر عشرتیان سهل
Нозами шаби одинаи моҳи рамазон ро
نازم شب آدینه ماه رمضان را
Инак задаам боли тақозои зи ду мисра
اینک زده ام بال تقاضا ز دو مصرع
То муждаи миъроҷи даҳуми саъии баён ро
تا مژده معراج دهم سعی بیان را
Зинсон ки фурӯи рафта ба дил , перу ҷавон ро
زینسان که فرو رفته به دل، پیر و جوان را
Мижгони ту ҷавҳар буд ойӣнаи ҷон ро
مژگان تو جوهر بود آیینه جان را
Водошт саги кӯии ту зин ҳад нашиносӣ
واداشت سگ کوی تو زین حد نشناسی
Дар пои ту мехостам ифшоанд равон ро
در پای تو می خواستم افشاند روان را
Бар турбатам аз нахли қадати ҷилваи Фрўбор
بر تربتم از نخل قدت جلوه فروبار
То хок кунад навбар аз он пои нишон ро
تا خاک کند نوبر از آن پای نشان را
Ҷустем суроғи чамани хулд ба мастӣ
جستیم سراغ چمن خلد به مستی
Дар гирди хироми ту раҳ афтод гумон ро
در گرد خرام تو ره افتاد گمان را
эй хок дарат қиблаи ҷону дили ғолиб
ای خاک درت قبله جان و دل غالب
Каз файзи ту пероя ҳастӣ сети ҷаҳон ро
کز فیض تو پیرایه هستی ست جهان را
То номи ту ширинӣ ҷон дода ба гуфтан
تا نام تو شیرینی جان داده به گفتن
Дар хеши фурӯи бардаи дил аз меҳри забон ро
در خویش فرو برده دل از مهر زبان را
Бар уммати ту дӯзах ҷовид ҳаромаст
بر امت تو دوزخ جاوید حرامست
Ҳошо ки шафоат накунӣ сӯхтагон ро
حاشا که شفاعت نکنی سوختگان را