зи баси тоби хироми калаками озари безад аз коғаз
ز بس تاب خرام کلکم آذر بیزد از کاغذ
Мидод андӯзам аз дӯдӣ ки ҳрдми хезад аз коғаз
مداد اندوزم از دودی که هردم خیزد از کاغذ
Надонам то чаҳ хоҳад кард бо чашму дили душман
ندانم تا چه خواهد کرد با چشم و دل دشمن
Роми калакам ки дар ҷунбиши ғубори ангезад аз коғаз
رم کلکم که در جنبش غبار انگیزد از کاغذ
Ба кзлк аз варақ чун бистарами сатри мукаррар ро
به کزلک از ورق چون بسترم سطر مکرر را
Ту гӯйии сўнши лаълу гуҳар май резад аз коғаз
تو گویی سونش لعل و گهر میریزد از کاغذ
Надонам ҳасрат рӯй ки мехоҳам рақам кардан
ندانم حسرت روی که میخواهم رقم کردن
Ки ҳарҷо бингарам завқи нигоҳами хезад аз коғаз
که هرجا بنگرم ذوق نگاهم خیزد از کاغذ
Ман ваносозӣ хуӣ ки дар таҳрири бедодаш
من و ناسازی خویی که در تحریر بیدادش
Ромади ҳарф аз қаламгар худ қалами нгризд аз коғаз
رمد حرف از قلم گر خود قلم نگریزد از کاغذ
Чаҳ бошад номаи гули ҷониби мурғи асири он ба
چه باشد نامه گل جانب مرغ اسیر آن به
Ки каси гулдастае пеши қафаси овезад аз коғаз
که کس گلدستهای پیش قفس آویزد از کاغذ
Чу истилоӣ шавқам дид кард аз номаи маҳрӯмам
چو استیلای شوقم دید کرد از نامه محرومم
Магар бар оташам бедард доман мезад аз коғаз
مگر بر آتشم بیدرد دامن میزد از کاغذ
з бе тобии рақами сӯяши дӯд чун нома бинивисам
ز بیتابی رقم سویش دود چون نامه بنویسم
Ба унвонӣ ки донеи дӯди бармеи хезад аз коғаз
به عنوانی که دانی دود برمیخیزد از کاغذ
Чаҳ гӯям аз хироми он ки дар ингораи қадаш
چه گویم از خرام آن که در انگاره قدش
Срири хомаи шӯри растхези ангезад аз коғаз
صریر خامه شور رستخیز انگیزد از کاغذ
Зуҳӯр омад таназзули ҳон ба чашм кам мубини ғолиб
ظهور آمد تنزل هان به چشم کم مبین غالب
Ба пайдоеи зи хокстм чу номи эзад аз коғаз
به پیدایی ز خاکستم چو نام ایزد از کاغذ