Чаҳ ғам ар ба ҷад гирифтӣ зи ман эҳтироз кардан ?

چه غم ار به جد گرفتی ز من احتراز کردن؟

Натавон гирифт аз ман ба гузаштаи ноз кардан

نتوان گرفت از من به گذشته ناز کردن

Нигаҳат ба мӯшикофии зи фиреби Ром нахурдан

نگهت به موشکافی ز فریب رم نخوردن

Нафасам ба доми бофии зи сухани дароз кардан

نفسم به دام بافی ز سخن دراز کردن

Ту ва дар канори шавқами гиреҳ аз ҷабин гушӯдан

تو و در کنار شوقم گره از جبین گشودن

Ман ва бар рухи ду олам дар дили фароз кардан

من و بر رخ دو عالم در دل فراز کردن

Мижаро зи хўнФшонӣ ба дили сети ҳамзабонӣ

مژه را ز خونفشانی به دل ست همزبانی

Ки шмордм ба домани ситами гудоз кардан

که شماردم به دامن ستم گداز کردن

Ба наварди поси розати хаҷал аз ғубори хешам

به نورد پاس رازت خجل از غبار خویشم

Ки зи пардаи рехти беруни ғами нолаи соз кардан

که ز پرده ریخت بیرون غم ناله ساز کردن

зи ғами ту боди шармам ки чаҳ мояи шӯхи чашмии сет

ز غم تو باد شرمم که چه مایه شوخ چشمی ست

зи шикасти ранг бар рух дар хулди боз кардан

ز شکست رنگ بر رخ در خلد باز کردن

Нафасам гудохт шавқати ситами сетгар ту доне

نفسم گداخت شوقت ستم ست گر تو دانی

Ки зи тоби нола хӯн шуд на зи поси роз кардан

که ز تاب ناله خون شد نه ز پاس راز کردن

Ба фишори рашки базмат на чунон гудохт гулшан

به فشار رشک بزمت نه چنان گداخت گلشن

Ки миёнаи гул ва мл расад имтиёз кардан

که میانه گل و مل رسد امتیاز کردن

Рухи гули зи ғозаи корӣ ба нигоҳи бандади ойин

رخ گل ز غازه کاری به نگاه بندد آیین

Нарасад ба хаси шикояти зи чамани тароз кардан

نرسد به خس شکایت ز چمن طراز کردن

Ҳамаи тани зи шавқи чашмам ки чу дил фишонда гардад

همه تن ز شوق چشمم که چو دل فشانده گردد

Ба сиришки мояи бахшами зи ҷигари гудоз кардан

به سرشک مایه بخشم ز جگر گداز کردن

Ҳилла тоза гашта ғолиби равиши назирӣ аз ту

هله تازه گشته غالب روش نظیری از تو

Сазад ин чунин ғазалро ба сафинаи ноз кардан

سزد این چنین غزل را به سفینه ناز کردن