Сӯфии ниҳоди дому срҳқаҳ боз кард
صوفی نهاد دام و سرحقه باز کرد
Бунёди магар бо фалаки ҳуққа боз кард
بنیاد مگر با فلک حقه باز کرد
Дар ҷавоб ӯ
در جواب او
Хуррами танӣ ки гӯии шаб аз ҷома боз кард
خرم تنی که گوی شب از جامه باز کرد
Порои бнрмдсти ниҳолӣ дароз кард
پارا بنرمدست نهالی دراز کرد
Бо анкаҳ икдрм натавон басти андрў
با انکه یکدرم نتوان بست اندرو
Дастори куҳнаи байн ки маро сарфароз кард
دستار کهنه بین که مرا سرفراز کرد
Миннат пазир кард ззилў ки бо намад
منت پذیر کرد ززیلو که با نمد
Аз бўрёўи пўсткт бениёз кард
از بوریاو پوستکت بی نیاز کرد
Ҳқо ки аз ҳақиқат мисвок ғофиласт
حقا که از حقیقت مسواک غافلست
Ҳамли ъамома анкаҳ биравӣ муҷоз кард
حمل عمامه انکه بروی مجاز کرد
Доман фишонд бар қдки Андами танам ки даст
دامن فشاند بر قدک آندم تنم که دست
Бар остини суфи мураббаъ дароз кард
بر آستین صوف مربع دراز کرد
Гар кснаҳи қиёми бтоът тавон намӯд
گر کسنه قیام بطاعت توان نمود
Беш ва пас бараҳна нишоед намоз кард
بیش و پس برهنه نشاید نماز کرد
Қории бикради болшки нозрўии кат
قاری بکرد بالشک نازروی کت
Онкўи надоди такя чаҳ ъушрат чаҳ ноз кард
آنکو نداد تکیه چه عشرت چه ناز کرد