Дорам аз зулфи сиёҳати гилаи чандон ки мапурс
دارم از زلف سیاهت گله چندان که مپرس
Ки чунон зу шудаам бисрўи сомон ки мапурс
که چنان زو شده ام بیسرو سامان که مپرس
Дар ҷавоб ӯ
در جواب او
Дорам аз бисрўи поӣии гилаи чандон ки мапурс
دارم از بیسرو پائی گله چندان که مپرس
Шудаи бирхти чунонам ман урён ки мапурс
شده بیرخت چنانم من عریان که مپرس
Ҳам зимистон зқзо нест бпоими шалвор
هم زمستان زقضا نیست بپایم شلوار
Ҳамаи каси таънаи занони ин ки мубини он ки мапурс
همه کس طعنه زنان این که مبین آن که مپرس
Баҳри ташриф касе мадҳи лӣимони мкнод
بهر تشریف کسی مدح لئیمان مکناد
Ки чунонам ман аз ин карда пушаймон ки мапурс
که چنانم من از این کرده پشیمان که مپرس
Бикии ҷомаи фахри ки бапушам гуҳи гуҳ
بیکی جامه فاخر که بپوشم گه گه
Мерасад он бмн аз чашми ҳасудон ки мапурс
میرسد آن بمن از چشم حسودان که مپرس
Гуфта будам нкшми ҷайб батон лек бабр
گفته بودم نکشم جیب بتان لیک ببر
Шева мекунад он ҷайби зари афшон ки мапурс
شیوه میکند آن جیب زر افشان که مپرس
Аз паии перҳану дориаҳу зудаи зФорс
از پی پیرهن و داریه و زوده زفارس
То бҳдисти марои майли сипоҳон ки мапурс
تا بحدیست مرا میل سپاهان که مپرس
Дар баҳорони дилам аз ҷома карбос гирифт
در بهاران دلم از جامه کرباس گرفت
Иштиёқаст маро бо рухи каттон ки мапурс
اشتیاقست مرا با رخ کتان که مپرس
Фитна мекунад он гӯй дару зари қорӣ
فتنه میکند آن گوی در و زر قاری
Дар бар атласу кмхои гулистон ки мапурс
در بر اطلس و کمخای گلستان که مپرس