Субҳи азали зи машриқи анвори ?бардамӣад
صبح ازل ز مشرق انوار بردمید
Аз нур рӯй ёр ба мо лмъаҳ Эй расед
از نور روی یار به ما لمعهای رسید
Айёми ҳиҷри ёри з андоза даргузашт
ایام هجر یار ز اندازه درگذشت
Субҳии зи нави баромаду рӯзии з нав дамид
صبحی ز نو برآمد و روزی ز نو دمید
Ҳар ҷойгаҳ ки нури рухи ёр ҷилва кард
هر جایگه که نور رخ یار جلوه کرد
Онҷои мурӣд роҳ ҷунайдасту боязид
آنجا مرید راه جنیدست و بایزید
эй дили биёу қисса ҳиҷронён магӯ
ای دل بیا و قصه هجرانیان مگو
Ҳамроҳи ишқи шӯ , ки марои даст ва ҳам мурӣд
همراه عشق شو، که مرا دست و هم مرید
Ҳарҷо ки ҷуръаи нӯши худои бода Эй хӯрд
هرجا که جرعهنوش خدا بادهای خورد
Аз коинот бонг барояд ки : « бар мазид »
از کاینات بانگ برآید که: «بر مزید»
Дил дар ҳиҷоби пардаи пиндори монда буд
دل در حجاب پرده پندار مانده بود
Ишқат раседу пардаи пиндор мо дарид
عشقت رسید و پرده پندار ما درید
Қосим ба орзӯӣ ту рафт аз ҷаҳони бурун
قاسم به آرزوی تو رفت از جهان برون
Воҳсрто ки як гул аз ин бӯстон начед !
واحسرتا که یک گل از این بوستان نچید!