Умрӣаст дар хаёли ту аз рӯз то ба шаб
عمریست در خیال تو از روز تا به شب
Дар оташам чу холи ту аз рӯз то ба шаб
در آتشم چو خال تو از روز تا به شب
Май сӯзам аз фироқи ту аз шом то ба рӯз
میسوزم از فراق تو از شام تا به روز
Маҳрӯмам аз ҷамоли ту аз рӯз то ба шаб
محرومم از جمال تو از روز تا به شب
Дорам ҳамешае бути дайри ошнои ман
دارم همیشه ای بت دیر آشنای من
Умед бар висоли ту аз рӯз то ба шаб
امید بر وصال تو از روز تا به شب
Боҷи мусалламии зи маи нав гирифта аст
باج مسلمی ز مه نو گرفته است
Абрӯӣ чун ҳилоли ту аз рӯз то ба шаб
ابروی چون هلال تو از روز تا به شب
Хоҳам чу сояи гирди ту гирдам дар ин чаман
خواهم چو سایه گرد تو گردم در این چمن
Чун қад кашад ниҳоли ту аз рӯз то ба шаб
چون قد کشد نهال تو از روز تا به شب
Қассоб ёфт лиззати осоиши ҷаҳон
قصاب یافت لذت آسایش جهان
То гашти поймоли ту аз рӯз то ба шаб
تا گشت پایمال تو از روز تا به شب