эй зулфи ту ҳамчуи шохи шамшод

ای زلف تو همچو شاخ شمشاد

Ваии қади ту ҳамчуи сарви озод

وی قد تو همچو سرو آزاد

Ҳар чанд марои заҳри ду ранҷ аст

هر چند مرا زهر دو رنج است

Боин ҳама то буд чунин бод

بااین همه تا بود چنین باد

Ашки ман ва рӯй хештани байн

اشک من و روی خویشتن بین

Гар диҷлаи надидаеу Бағдод

گر دجله ندیده ای و بغداد

Зулфи ту агар дилии зи ман барад

زلف تو اگر دلی ز من برد

Лабҳои ту сад ҳазор ҷон дод

لبهای تو صد هزار جان داد

Гўӣӣ ки забони ту ки бастаст ?

گوئی که زبان تو که بستست؟

Он баст ки об дида бикшод

آن بست که آب دیده بگشاد

Пурсӣ ки туро ки зад чаҳ гӯям

پرسی که تو را که زد چه گویم

Он зад ки Ақилае чу ту зод

آن زد که عقیله ای چو تو زاد

Шодӣ бирасад марои зи васлат

شادی برسد مرا ز وصلت

Аз ширин ғам расад ба Фарҳод

از شیرین غم رسد به فرهاد

Аз дасти ту хостам чу кардан

از دست تو خواستم چو کردن

Фарёд кам аз ту буд бедод

فریاد کم از تو بود بیداد

Ширинӣ ёд кард он лаб

شیرینی یاد کرد آن لب

Андари гулӯами шикасти фарёд

اندر گلوم شکست فریاد

Рафт он ки ту будӣу қавомӣ

رفت آن که تو بودی و قوامی

Дигар нашавад зи васли ту шод

دیگر نشود ز وصل تو شاد

Кӣ боз шавад ба ҷои ҳаргиз

کی باز شود به جای هرگز

Хиштӣ ки зи колбуди биФтод

خشتی که ز کالبد بیفتاد