Моро ба як киришмаи зи аҳл ниёз кард
ما را به یک کرشمه ز اهل نیاز کرد
Пас парда барграфту бмо низ ноз кард
پس پرده برگرفت و بما نیز ناز کرد
То шоҳи мо зи кишвари мо рахти баст ва рафт
تا شاه ما ز کشور ما رخت بست و رفت
Хайли бало ба кишвари дил трктоз кард
خِیل بلا به کشور دل ترکتاز کرد
Оўх ки нақди умри азиз аз сари ниёз
آوخ که نقد عمر عزیز از سر نیاز
Дар мақдамаш нисор намудем ва ноз кард
در مقدمش نثار نمودیم و ناز کرد
Кӯтоҳ кард риштаи умри ғубор ро
کوتاه کرد رشتۀ عمر غبار را
То золи чархи риштаи даврон дароз кард
تا زال چرخ رشته دوران دراز کرد
Даврӣ намӯд агар чаҳ ба сӯрати зи чашми мо
دوری نمود اگر چه به صورت ز چشم ما
Наздикии ҳақиқии моро муҷоз кард
نزدیکی حقیقی ما را مجاز کرد
Ғамҳои мурдаро ба яке нафхаи зиндаи сохт
غم های مرده را به یکی نفخه زنده ساخت
Ёрб чаҳ сувар буд ки ин нағма соз кард
یارب چه صور بود که این نغمه ساز کرد
Олӯда буд доманам аз ашки чашму шайх
آلوده بود دامنم از اشک چشم و شیخ
Пиндошт бодааст аз он эҳтироз кард
پنداشت باده است از آن احتراز کرد
Лҷоҷи ғам ба тарбиятам ранҷҳо кашид
لجاج غم به تربیتم رنجها کشید
То дар ғубори ишқи маро покбоз кард
تا در غبار عشق مرا پاکباز کرد