Ҳаргизи маро ба каъбаи зи дайр илтиҷо нашуд

هرگز مرا به کعبه ز دیر التجا نشد

Як ҳоҷатам намонад ки онҷо раво нашуд

یک حاجتم نماند که آنجا روا نشد

Бахтами фиреби ҷилваи нек ахтарӣ нахурд

بختم فریب جلوه نیک‌اختری نخورد

Фарқами забуни сояи бол ҳумо нашуд

فرقم زبون سایه بال هما نشد

Дар ҳайрат аз шикастагии шишаи дилам

در حیرت از شکستگی شیشه دلم

Бо онкии ҳаргиз аз кафи хубон раҳо нашуд

با آنکه هرگز از کف خوبان رها نشد

Рӯз висол нест ҷузи ин ҳайратам ки чун

روز وصال نیست جز این حیرتم که چون

Дар дидаам назораи азин беш ҷо нашуд ?

در دیده‌ام نظاره ازین بیش جا نشد؟

То ишқ , тавба дод диламро зи тарки хеш

تا عشق، توبه داد دلم را ز ترک خویش

Як саҷдаам зи тоъати хубон қазо нашуд

یک سجده‌ام ز طاعت خوبان قضا نشد

Бошад ҳануз ҳасрати тири ту дар дилам

باشد هنوز حسرت تیر تو در دلم

Бо онкии як хаданги ту аз дил хато нашуд

با آنکه یک خدنگ تو از دل خطا نشد

Нанишаст фитнае зи ҳаводиси дарин диёр

ننشست فتنه‌ای ز حوادث درین دیار

Каз қомати ту фитнаи дигар бпо нашуд

کز قامت تو فتنه دیگر بپا نشد

Рӯзӣ ба шоми барад ба кӯрӣ , чу хуфтагон

روزی به شام برد به کوری، چو خفتگان

Субҳӣ ки чашми меҳр ба рӯй ту во нашуд

صبحی که چشم مهر به روی تو وا نشد

Як бор ёфтам зи ту дастури саҷда Эй

یک بار یافتم ز تو دستور سجده‌ای

Чун сояам зи хок , дигар тан ҷудо нашуд

چون سایه‌ام ز خاک، دگر تن جدا نشد

Бо онкии нақди умр , марои сарф дӯст шуд

با آنکه نقد عمر، مرا صرف دوست شد

Як рӯзаи дайни муддати васлаш адо нашуд

یک روزه دین مدت وصلش ادا نشد

Ҳарҷо ҳадиси зулфи ту мазкӯр шуд маро

هرجا حدیث زلف تو مذکور شد مرا

Бар тани кадоми мӯ ки забон дуо нашуд ?

بر تن کدام مو که زبان دعا نشد؟

Моро ҳамин басаст ки бегона шуд зи ғайр

ما را همین بس است که بیگانه شد ز غیر

Қудсӣ чаҳ ғам ки ёр ба мо ошно нашуд

قدسی چه غم که یار به ما آشنا نشد