Дар чаман кӣ дилам аз файз ҳаво бигушоед ?

در چمن کی دلم از فیض هوا بگشاید؟

Парда бигушо ки зи рӯяти дил мо бигушоед

پرده بگشا که ز رویت دل ما بگشاید

Айши ин боғ ба андозаи як тнгдл аст

عیش این باغ به اندازه یک تنگدل است

Коши гул ғунча шавад то дил мо бигушоед

کاش گل غنچه شود تا دل ما بگشاید

Бар сари накҳати зулфат чу сабо май ларзам

بر سر نکهت زلفت چو صبا می‌لرزم

Ки мабодои сари зулфи ту сабо бигушоед

که مبادا سر زلف تو صبا بگشاید

Умрҳо рафт ки лаби ташна теғ ситамем

عمرها رفت که لب‌تشنه تیغ ستمیم

Раҳматии кӯ ки раги абр бало бигушоед

رحمتی کو که رگ ابر بلا بگشاید

Буии пероҳани Юсуф ба сабо боз диҳанд

بوی پیراهن یوسف به صبا باز دهند

Ҳар куҷои Юсуфи ман банд қабо бигушоед

هر کجا یوسف من بند قبا بگشاید

Гар буд буии сари зулфи ту ҳамроҳи сабо

گر بود بوی سر زلف تو همراه صبا

Бӯстони даст ба тороҷ сабо бигушоед

بوستان دست به تاراج صبا بگشاید

То ки аз сина бурун карда ғамии боз , ки ишқ

تا که از سینه برون کرده غمی باز، که عشق

намефиристад ба дилами мужда ки ҷо бигушоед

می‌فرستد به دلم مژده که جا بگشاید

Осмон чун маи нав ,гар ҳама нохун гардад

آسمان چون مه نو، گر همه ناخن گردد

Натавонади гиреҳ аз ришта мо бигушоед

نتواند گره از رشته ما بگشاید

Ҳеҷ каси риштаи зи мактуби дилам боз накард

هیچ‌کس رشته ز مکتوب دلم باز نکرد

Сари ин номаи магари рӯз ҷазо бигушоед

سر این نامه مگر روز جزا بگشاید

Қудсӣ аз ишқи раҳои матлаб кин сайёд

قدسی از عشق رهایی مطلب کاین صیاد

Банд бар дил чу наад , риштаи з по бигушоед

بند بر دل چو نهد، رشته ز پا بگشاید