Кӣ давоҷу буд он дил ки зи дардаш дам зад
کی دواجو بود آن دل که ز دردش دم زد
Доғ бе дардии онам ки дам аз марҳам зад
داغ بیدردی آنم که دم از مرهم زد
Бо хиради рӯзи азал бар сар савдо будам
با خرد روز ازل بر سر سودا بودم
Ишқ пеш омаду савдои маро барҳам зад
عشق پیش آمد و سودای مرا برهم زد
Меҳнати ҳиҷр ту донад ки чаҳ бо ҷонҳо кард
محنت هجر تو داند که چه با جانها کرد
Шуълаи ишқ ту донад ки чаҳ дар олам зад
شعله عشق تو داند که چه در عالم زد
Гӯши каси бохабар аз замзама шавқ набӯд
گوش کس باخبر از زمزمه شوق نبود
Ишқати он рӯз ки нохун ба дил одам зад
عشقت آن روز که ناخن به دل آدم زد
Малик дунё набӯд манзили арбоби сарвар
ملک دنیا نبود منزل ارباب سرور
Ҳарки афтод дарин кӯча , дар мотам зад
هرکه افتاد درین کوچه، در ماتم زد
Дасти икроми ту буд онкии саҳаргоҳи азал
دست اکرام تو بود آنکه سحرگاه ازل
Хон бияфканаду сало бар ҳама олам зад
خوان بیفکند و صلا بر همه عالم زد
Ишқ мегуфт ба гаҳвораи дилами хуши тифлии сет
عشق میگفت به گهواره دلم خوش طفلیست
Ки дар аввали қадам , аз пояи аъло дам зад
که در اول قدم، از پایه اعلا دم زد
Бо ҷунун буд марои силсилаи пуршурӣ
با جنون بود مرا سلسله پرشوری
Ақли гуми бод ки ин силсиларо бар ҳам зад
عقل گم باد که این سلسله را بر هم زد
То сар аз ҷайб баровард дилам чун қудсӣ
تا سر از جیب برآورد دلم چون قدسی
Даст дар домани он турраи хам дар хам зад
دست در دامن آن طره خم در خم زد