Хаташро кас ба ҷузи ман мубтало нест
خطش را کس به جز من مبتلا نیست
Ба ин хати чашми ҳаркас ошно нест
به این خط چشم هرکس آشنا نیست
Чаман шуд аз ҳуҷуми гули чунон танг
چمن شد از هجوم گل چنان تنگ
Ки мурғонро барои нола ҷо нест
که مرغان را برای ناله جا نیست
Ба ман хуш мерасад лутфи ту имрӯз
به من خوش میرسد لطف تو امروز
Магари чашми бидонадяш аз қафо нест ?
مگر چشم بداندیش از قفا نیست؟
Чаҳ шуд буии гули умед ё раб
چه شد بوی گل امید یا رب
Ки рафт аз бӯстон ва бо сабо нест
که رفت از بوستان و با صبا نیست
Хамӯшӣ пеша кунгар марди ишқӣ
خموشی پیشه کن گر مرد عشقی
Ки мурғи ин гулистонро наво нест
که مرغ این گلستان را نوا نیست