Хизри сарчашма врнок ҷӯяд
خَضِر سرچشمه ورناک جوید
Ки даст аз чашма ҳайвон бишӯяд
که دست از چشمه حیوان بشوید
Муҳӣт аз шарми реги оби врнок
محیط از شرم ریگ آب ورناک
Арақ аз ҷабҳа гавҳар кунад пок
عرق از جبهه گوهر کند پاک
Фурот аз рашки наҳраш Карбало шуд
فرات از رشک نهرش کربلا شد
зи ғайрати диҷларо , нам тўтё шуд
ز غیرت دجله را، نم توتیا شد
Чаҳ шудгар Хизрро ҳам ҷуръа Эй дод
چه شد گر خضر را هم جرعهای داد
Расад ин чашмаи дарёро ба фарёд
رسد این چشمه دریا را به فریاد
зи файзаш малик Кашмӣраст маъмур
ز فیضش ملک کشمیرست معمور
Азин сарчашмаи бодои чашми бади давр
ازین سرچشمه بادا چشم بد دور
Агар завқи баҳору сабзаи дорӣ
اگر ذوق بهار و سبزه داری
Ба ҷузи Кашмӣр дар хотир наёрӣ
به جز کشمیر در خاطر نیاری