Гирифтае злби лаъл , рӯй ман дар зар
گرفته ای زلب لعل، روی من در زر
Чу дидае ки туро ва марост дархури зар
چو دیده ای که ترا و مراست درخور زر
Висоли симбри ту ки чун зараст ъзизо
وصال سیمبر تو که چون زر است عزیزا
Месерум шавад , ар гардадам муяссари зар
میسرم شود، ار گرددم میسر زر
Зчшми пургуҳари хеш рӯй тар дорам
زچشم پرگهر خویش روی تر دارم
Ки хуштар омад нҳмор чун шавадтар зар
که خوشتر آمد نهمار چون شود تر زر
Зошк рӯй чаҳ хезади маро ки чун наргис
زاشک روی چه خیزد مرا که چون نرگس
Ба чашм ноидт Арасем бошудам ар зар
به چشم نایدت ارسیم باشدم ار زر
Зтоби озари меҳру ҳавоати печонам
زتاب آذر مهر و هوات پیچانم
Аз онкӣ печон гардад зтоби озари зар
از آنکه پیچان گردد زتاب آذر زر
Чу нақши оина рӯй аз ту брнгрдонм
چو نقش آینه روی از تو برنگردانم
Киро дареғ буд аз ту сими пайкари зар
که را دریغ بود از تو سیم پیکر زر
Ба аҳди ҷӯади худованди бас аҷаб набӯд
به عهد جود خداوند بس عجب نبود
Агар рухам шавад аз ишқи ту саросари зар
اگر رخم شود از عشق تو سراسر زر
Паноҳи фазл , Абулфазли фахри давлати вдин
پناه فضل، ابوالفضل فخر دولت ودین
Ки шуд чу хок ба пеши кафши муҳақари зар
که شد چو خاک به پیش کفش محقر زر
Туе ки расми тарозу ба аҳд ту бархест
تویی که رسم ترازو به عهد تو برخاست
Ки назд ҷӯади ту бо санг шуд баробари зар
که نزد جود تو با سنگ شد برابر زر
Ба аҳди ҳукми ту бар ҳечкас наёяд зулм
به عهد حکم تو بر هیچکس نیاید ظلم
Задаст симкши роди ту , магар бар зар
زدست سیمکش راد تو، مگر بر زر
Ту он хуҷастаи танӣ каз хавоси иқболат
تو آن خجسته تنی کز خواص اقبالت
Ҷаҳон гирифт рухи бадсиголро дар зар
جهان گرفت رخ بدسگال را در زر
Ба буи онкӣ кунад бар кафати магари гузарӣ
به بوی آنکه کند بر کفت مگر گذری
Ба бӯстон кунад аз чашми хеши ъбҳри зар
به بوستان کند از چشم خویش عبهر زر
Зчҳраҳ ӣ адуат , гашти айши ман чўшкр
زچهره ی عدوت، گشت عیش من چوشکر
Ки айшҳоро ширин кунад чу шукри зар
که عیشها را شیرین کند چو شکر زر
Збҳри онкӣ ба рӯй адуӣ ту монад
زبهر آنکه به روی عدوی تو ماند
Ҳазор захм ззроб хӯрд бар сари зар
هزار زخم زضراب خورد بر سر زر
Чу зари кӯҳи зондозаҳ ӣ сахоат кам аст
چو زر کوه زاندازه ی سخات کم است
Ба дори зарб фалак мезананд аз ахтари зар
به دار ضرب فلک می زنند از اختر زر
Ба назд ҳиммати ту бас муҳақар ояд ҳам
به نزد همت تو بس محقر آید هم
Вагар занад кафи гардуни зқрсаҳ ӣ хури зар
وگر زند کف گردون زقرصه ی خور زر
зи зар аҷаб набӯд гар гирифт براردи хок
ز زر عجب نبود گر گرفت برآرد خاک
Ки хок буд ҳам аз ибтидо ба гавҳари зар
که خاک بود هم از ابتدا به گوهر زر
Збими бахшиш ту бошад ин ки гаҳгоҳӣ
زبیم بخشش تو باشد این که گهگاهی
Ҳамеи гурезад дар зинҳор ханҷари зар
همی گریزد در زینهار خنجر زر
Зғоити тараби онкӣ бар кафат гузарад
زغایت طرب آنکه بر کفت گذرد
Барояд аз камари кӯҳи сурхи рӯ ҳар зар
برآید از کمر کوه سرخ رو هر زر
Збхшши ту чу зарро намонад ному нишон
زبخشش تو چو زر را نماند نام و نشان
Равои мадор ки гӯям ба аҳди ту зари зар
روا مدار که گویم به عهد تو زر زر
Муқарараст ки рӯем збии зарӣ чу зар аст
مقرر است که رویم زبی زری چو زر است
Чаҳ бошад ар ба ман аз ту шавад муқарари зар ?
چه باشد ار به من از تو شود مقرر زر؟
Ҳамеша то ки буд бар канори оинаи сим
همیشه تا که بود بر کنار آینه سیم
Мудом то ки буд дар миёни зевар , зар ,
مدام تا که بود در میان زیور، زر،
Зошки бодо дар домани адуии ту , сим
زاشک بادا در دامن عدوی تو، سیم
Зкони ҷӯади ту дар остини чокари зар
زکان جود تو در آستین چاکر زر