Ту ҳар чаҳ ноз кунӣ мо агар кунем ниёз
تو هر چه ناز کنی ما اگر کنیم نیاز
Ниёзманд ту ҳастем ноз мекун ноз
نیازمند تو هستیم ناز میکن ناز
зи каъбаи роҳ ба кӯии ту ме тавон бурдан
ز کعبه راه به کوی تو می توان بردن
Аз онкии қнтраҳ эй бар ҳақиқатаст муҷоз
از آنکه قنطره ای بر حقیقت است مجاز
Ҳадиси ишқ бар пери ақли барадами дӯш
حدیث عشق بر پیر عقل بردم دوش
Чунон бхўиш фурӯ рафт каш надидам боз
چنان بخویش فرو رفت کش ندیدم باز
Ту , бози ҳасани пурАндӣ ва ман кабӯтари дил
تو، باز حسن پراندی و من کبوتر دل
Кабӯтарӣ ки равад сӯй боз ноед боз
کبوتری که رود سوی باز ناید باز
Тугар , ба ҳасану ҷамолии зи ҷамъи хубони фард
تو گر، به حسن و جمالی ز جمع خوبان فرد
Манам зи фазлу маъонии зъошқони мумтоз
منم ز فضل و معانی زعاشقان ممتاز
Шаби фироқи зи зулфи ту шиква хоҳам кард
شب فراق ز زلف تو شکوه خواهم کرد
Ки рӯзи васли басӣ кӯтаҳасту қиссаи дароз
که روز وصل بسی کوته است و قصه دراز
Ту эй ишқ набадараст кўзнди он тарк
تو ای عشق نبدر است کوزند آن ترک
Ҳазор шӯри барангезад аз Ироқу ҳиҷоз
هزار شور برانگیزد از عراق و حجاز
Гузашти новаки нозаши марои зи ҷавшани ҷон
گذشت ناوک نازش مرا ز جوشن جان
Фиғони зи дасти камони абрувони тирандоз
فغان ز دست کمان ابروان تیرانداز
Набот « занад » ба Мозандарон шудааст шукр
نبات «زند» به مازندران شده است شکر
зи шаҳди шеъри шикаррез « ҳоҷиб » Широз
ز شهد شعر شکرریز «حاجب » شیراز