Субҳ шуд соқёни масту хароб

صبح شد ساقیان مست و خراب

Дар каду , аз сабу кунед шароб

در کدو، از سبو کنید شراب

Шаби торики рӯз равшан шуд

شب تاریک روز روشن شد

Алсбўҳи алсбўҳ ё асҳоб

الصبوح الصبوح یا اصحاب

Субҳ шуд навбат сабӯҳӣ шуд

صبح شد نوبت صبوحی شد

Рухи бшўӣид аз хумории хоб

رخ بشوئید از خماری خواب

Субҳ шуд кард офтоби тулӯъ

صبح شد کرد آفتاب طلوع

Тобкӣ май кашем дар маҳтоб

تابکی می کشیم در مهتاب

Субҳи содиқ чу шуд Суҳайл дамид

صبح صادق چو شد سهیل دمید

Марди бечораи кирмаки шаби тоб

مرد بیچاره کرمک شب تاب

Бодаи даҳ соқиои адаб то чанд

باده ده ساقیا ادب تا چند

Байни алоҳбоби тсқти олодоб

بین الاحباب تسقط آلاداب

Мо з хам ёфтему майхона

ما ز خم یافتیم و میخانه

Ончӣ май хости зоҳид аз миҳроб

آنچه می خواست زاهد از محراب

Сбҳаҳи он давр ,ро нахоҳад зад

سبحه آن دور، را نخواهد زد

Ки занад даври ҷоми бодаи ноб

که زند دور جام باده ناب

Нақд бо соқӣасту нася ба маҳз

نقد با ساقی است و نسیه به محض

Хулди кавсари кўоӣби алотроб

خلد کوثر کوائب الاتراب

Чанд соғар , ба « ҳоҷиб » дарвеш

چند ساغر، به «حاجب » درویش

Дод бояд ба бонги чангу рубоб

داد باید به بانگ چنگ و رباب