з рӯй , то маи ман зулфи пар зтоб гирифт

ز روی، تا مه من زلف پر زتاب گرفت

Ҳазор нуктаи равшан бар офтоб гирифт

هزار نکته روشن بر آفتاب گرفت

Ғроби шаб бар зулфи вай ошён дорад

غراب شب بر زلف وی آشیان دارد

Ки субҳи нози сипеди он сияҳ ғроб гирифт

که صبح ناز سپید آن سیه غراب گرفت

Шароби биғш соқӣ фузуд мастии ман

شراب بیغش ساقی فزود مستی من

Бидон мисол ки ҳастӣ ман шароб гирифт

بدان مثال که هستی من شراب گرفت

Хуй аз ҷабин ба замини рехти ёри глрхи ман

خوی از جبین به زمین ریخت یار گلرخ من

Ҳамаи бисоти замин дар гул ва гулоб гирифт

همه بساط زمین در گل و گلاب گرفت

Ҷаҳон чу , сина сино шуд аз таҷаллии нур

جهان چو، سینه سینا شد از تجلی نور

Магар , зи рухи маи ман нимаи шаб ниқоб гирифт

مگر، ز رخ مه من نیمه شب نقاب گرفت

Аласти рбкми аввали суоли ҷонон буд

الست ربکم اول سئوال جانان بود

зи меҳру моҳи балии рбно ҷавоб гирифт

ز مهر و ماه بلی ربنا جواب گرفت

Хароби мардум чашм марост хонаи зи об

خراب مردم چشم مراست خانه ز آب

Ду чашмаро натавон басту роҳ об гирифт

دو چشمه را نتوان بست و راه آب گرفت

Биё , ба кӯии харобот аз тариқи адаб

بیا، به کوی خرابات از طریق ادب

Ки ақли кул ба адаби ҷо дар он ҷаноб гирифт

که عقل کل به ادب جا در آن جناب گرفت

Ту рост бар сари чашми ҷаҳони макон « ҳоҷиб »

تو راست بر سر چشم جهان مکان «حاجب »

Ки ёри пеши ту ногуҳи зи рух ҳиҷоб гирифт

که یار پیش تو ناگه ز رخ حجاب گرفت