Онкӣ дар наср , ба даъвии яд Байзо ме кард

آنکه در نثر، به دعوی ید بیضا می‌کرد

Кош бар сафҳаи назми ту тамошо ме кард

کاش بر صفحه نظم تو تماشا می‌کرد

Назму насри ту яқини оби ҳаёт абад аст

نظم و نثر تو یقین آب حیات ابد است

Ки Сикандар , дамӣ аз Хизр таманно ме кард

که سکندر، دمی از خضر تمنا می‌کرد

Тӯтӣ аз хомаи ту шукр иншо ме хӯрд

طوطی از خامه تو شکر انشا می‌خورد

Булбул аз номаи ту хоҳиш имло ме кард

بلبل از نامه تو خواهش املا می‌کرد

Дар паии расми тақозоати алии алрсми лабам

در پی رسم تقاضات علی الرسم لبم

Баъди мадҳ аз даҳанати бӯса тақозо ме кард

بعد مدح از دهنت بوسه تقاضا می‌کرد

Шоҳ аз пел пиёда кунад , аз асби вазир

شاه از پیل پیاده کند، از اسب وزیر

Онкии олами ҳамаи моти рух зебо ме кард

آنکه عالم همه مات رخ زیبا می‌کرد

Файзи рӯҳи алқудси андари қалам қудрат ӯст

فیض روح‌القدس اندر قلم قدرت اوست

Зон ки гоҳи сухани эъҷоз масеҳо ме кард

زان که گاه سخن اعجاز مسیحا می‌کرد

Дили садафи вор , пар аз маънии гавҳар , бад аз он

دل صدف‌وار، پر از معنی گوهر، بد از آن

Синаи софии мо санъат дарё ме кард

سینه صافی ما صنعت دریا می‌کرد

Сӯхтам аз шарари оташи ғайрат « ҳоҷиб »

سوختم از شرر آتش غیرت «حاجب»

Муддаигар ҳавас сӯхтан мо ме кард

مدعی گر هوس سوختن ما می‌کرد