Бар сари хокам агар ёргузорӣ бикунад

بر سر خاکم اگر یار گذاری بکند

Рӯҳ боз ояд ва бо ҷисми қарории бикунад

روح باز آید و با جسم قراری بکند

Ҳеҷ донеи з чаҳ домони фалак пургуҳар аст

هیچ دانی ز چه دامان فلک پرگهر است

Хост ҳар субҳи бпои ту нисории бикунад

خواست هر صبح بپای تو نثاری بکند

Карда ҳоил ба рухи он тарки ҳисории хами зулф

کرده حایل به رخ آن ترک حصاری خم زلف

То ба субҳ аз шаби диҷўри ҳисории бикунад

تا به صبح از شب دیجور حصاری بکند

Ҳар ки аз ақл занад дам ба бар шефтагон

هر که از عقل زند دم به بر شیفتگان

Ишқ албата ба байняши маҳории бикунад

عشق البته به بینیش مهاری بکند

Дигар аз гардиши гетӣ чаҳ таманно дорад

دیگر از گردش گیتی چه تمنا دارد

Ориф ар сайр хазонеу баҳории бикунад

عارف ار سیر خزانی و بهاری بکند

Даҳр чун таҳтаи қазои муҳраи фалаки куҳнаи ҳариф

دهر چون تخته قضا مهره فلک کهنه حریف

Кист мардӣ ки дар ин нарад қимории бикунад

کیست مردی که در این نرد قماری بکند

Ошиқ онаст ки дар арсаи шатранҷи бало

عاشق آن است که در عرصه شطرنج بلا

Дайну дили моти рухи шоҳсўории бикунад

دین و دل مات رخ شاهسواری بکند

Илм омӯз ва қаноат куну азлати багазин

علم آموز و قناعت کن و عزلت بگزین

Мард бояд ки аз ин як ду се кории бикунад

مرد باید که از این یک دو سه کاری بکند

Вақти мурдани набарди ҳасрати дунё дар хок

وقت مردن نبرد حسرت دنیا در خاک

Варна ҳар арбадаи ҷӯи дафъи хумории бикунад

ورنه هر عربده جو دفع خماری بکند

« ҳоҷбо » саъд шавад толеъи олами зини пас

«حاجبا» سعد شود طالع عالم زین پس

Кавкаби бахти тугар зонка мадории бикунад

کوکب بخت تو گر زانکه مداری بکند