Дар ҷаҳони зоғ агар даъвӣ шаҳбоз кунад

در جهان زاغ اگر دعوی شهباز کند

Мушти худро бар мурғони чаман боз кунад

مشت خود را بر مرغان چمن باز کند

зи онкии шаҳбоз на танҳо ҳунараш парвоз аст

ز آنکه شهباز نه تنها هنرش پرواز است

Варна ҳар мурғ тавонист ки парвоз кунад

ورنه هر مرغ توانست که پرواز کند

Кор ҳар булҳавасӣ нест дам аз ишқ занад

کار هر بوالهوسی نیست دم از عشق زند

Соҳир ӣнҷо натавон даъвӣ эъҷоз кунад

ساحر اینجا نتوان دعوی اعجاز کند

Хоҷаи шӯ , бандаи ҳирсу тамаъ ва оз мабош

خواجه شو، بنده حرص و طمع و آز مباش

эй басои фитна ки ҳирсу тамаъ ва оз кунад

ای بسا فتنه که حرص و طمع و آز کند

То дил аз қайд таъаллуқ нашуд озод чу сарв

تا دل از قید تعلق نشد آزاد چو سرو

Хештанро натавонист сарафроз кунад

خویشتن را نتوانست سرافراز کند

Онкӣ нодам шавад аз карда хеши охири кор

آنکه نادم شود از کردهٔ خویش آخر کار

Фикри анҷоми худ он ба ки з оғоз кунад

فکر انجام خود آن به که ز آغاز کند

Мурғи ҳқгў чу зи ҳақи гуфтани худ гашт хамӯш

مرغ حقگو چو ز حق گفتن خود گشت خموش

Ҷғд , ҷо дар сафи мурғони хуш овоз кунад

جغد، جا در صف مرغان خوش‌آواز کند

( собир ) ин он ғазали нағз ( ғмом )аст ки гуфт

(صابر) این آن غزل نغز (غمام) است که گفت

« чун насими саҳарии пардаи гул боз кунад »

«چون نسیم سحری پرده گل باز کند»