Ба вақт субҳ нишинад касе чунин бекор
به وقت صبح نشیند کسی چنین بیکار
Мхсби соқӣ ва бархез ҷон бода биор
مخسب ساقی و برخیز جان باده بیار
Дар об баста фикан аз суроҳеи оташ тар
در آب بسته فکن از صراحی آتش تر
Ки зуд бугзарад ин хокдони боди виқор
که زود بگذرد این خاکدان باد وقار
Каронаи ҷӯии зи ақли Ақилаи ҷӯии фусӯл
کرانه جوی ز عقل عقیله جوی فصول
Канори сабзаи ватани гири коўФтӣ ба канор
کنار سبزه وطن گیر کاوفتی به کنار
Хушаст он дами мастӣ ки пеши ҳиммати маст
خوش است آن دم مستی که پیش همت مست
Буд мамолики олами ҳақир ва бе миқдор
بود ممالک عالم حقیر و بی مقدار
Чаҳ хуштар аз дили мастӣ ки аз нишоти сабӯҳ
چه خوشتر از دل مستی که از نشاط صبوح
Чунон шавад ки нагардад ба давр аз тимор
چنان شود که نگردد به دور از تیمار
Ҷаҳони чунин хуш ва ман ошиқу ҳузури ҳариф
جهان چنین خوش و من عاشق و حضور حریف
Наузи биллоҳ чун ту ба нашканам зинҳор
نعوذ بالله چون تو به نشکنم زنهار
Биёу бода ба дасти ор варна рндосо
بیا و باده به دست آر ورنه رندآسا
Грўкнм ба хароботи ҷбаҳу дастор
گروکنم به خرابات جبه و دستار
Бихонад ин ғазалтар чунонкии мустамеъон
بخواند این غزل تر چنانکه مستمعان
Заданд зиҳи зиҳу аҳсант ҳар яке сад бор
زدند زه زه و احسنت هر یکی صد بار
Суол кард зи сории ҳазор дастон низ
سئوال کرد ز ساری هزار دستان نیز
Ки ҳон бихон ҳам аз ин биткии се чаҳор
که هان بخوان هم از این بیتکی سه چهار
Ҷавоб дод ки ҳин гӯши дори пас бар хонд
جواب داد که هین گوش دار پس بر خواند
Бидон хушӣ ки з ҷонам бирафт сабру қарор
بدان خوشی که ز جانم برفت صبر و قرار
Хушо ба мавсими наврӯзи буии боди баҳор
خوشا به موسم نوروز بوی باد بهار
Хушо ба субҳдами овози булбул аз гулзор
خوشا به صبحدم آواز بلبل از گلزار
Паёми дӯсти зи боди баҳор май шинавам
پیام دوست ز باد بهار می شنوم
Ғуломи боди баҳорами ғуломи боди баҳор
غلام باد بهارم غلام باد بهار
Ба армағонии ман буии дӯст май орад
به ارمغانی من بوی دوست می آرد
Чу мекунад саҳарии корвони боди гузор
چو می کند سحری کاروان باد گذار
Ғамин ба гӯша саҳро нишаста будам дӯш
غمین به گوشه صحرا نشسته بودم دوش
Бидон умед ки бодии вазади паёми гузор
بدان امید که بادی وزد پیام گزار
Ҳазор ҷони гиромии фидои боди саҳар
هزار جان گرامی فدای باد سحر
Ки май баради зи раҳи даври буии ёр ба ёр
که می برد ز ره دور بوی یار به یار
Чаҳ хуштар аз нафаси субҳдам ки аз раҳи давр
چه خوشتر از نفس صبحدم که از ره دور
Ба бедилии хабари хуши расонад аз дилдор
به بیدلی خبر خوش رساند از دلدار
Чаҳ ҷонФзоӣ тараст аз насими боди саҳар
چه جانفزای تر است از نسیم باد سحر
Ки ошиқонро дар субҳ мекунад бедор
که عاشقان را در صبح می کند بیدار
Чу сории ин ғазали нағзро ба охир хонд
چو ساری این غزل نغز را به آخر خواند
Падед кард аз уфуқи субҳи аввалин осор
پدید کرد از افق صبح اولین آثار
Сипедаи дам чу шаҳаншоҳ шарқ кард бурун
سپیده دم چو شهنشاه شرق کرد برون
Сар аз даричаи ин сабзи гунбади даввор
سر از دریچه این سبز گنبد دوار
Надидам ва нишнидам бидон хушии саҳарӣ
ندیدم و نشنیدم بدان خوشی سحری
Ҳануз он ду ғазал мекунад дилами такрор
هنوز آن دو غزل می کند دلم تکرار
Ғуломи хотири он шоирам ки дар гуҳи назм
غلام خاطر آن شاعرم که در گه نظم
Бад-ӣни сифати суханӣ моҷаро кунад изҳор
بدین صفت سخنی ماجرا کند اظهار