Ки май баради зи ман хастаи дил ба ёри паём

که می برد ز من خسته دل به یار پیام

Ки май расонадаш аз лафзи ман дуруду салом

که می رساندش از لفظ من درود و سلام

Кромҷол буд каз малоли хотир ӯ

کرامجال بود کز ملال خاطر او

Дар афканди сухани ман алӣ алхусус паём

در افکند سخن من علی الخصوص پیام

Крости Зуҳра ки бо оннигор Зуҳраи ҷабин

کراست زهره که با آن نگار زهره جبین

Ҳадис ман кунад оғоз аз сари икром

حدیث من کند آغاز از سر اکرام

зи моҷарои ман ӯро ки мекунад огоҳ

ز ماجرای من او را که می کند آگاه

зи воқеъоти ман ӯро ки мекунад эълом

ز واقعات من او را که می کند اعلام

Ба гӯш ӯ ки расонади фиғону нолаи ман

به گوش او که رساند فغان و ناله من

Ки бўӣӣ оварад аз зулф ӯ маро ба машом

که بوئی آورد از زلف او مرا به مشام

Ки меравад ки бигӯед ки дар фироқи рахт

که می رود که بگوید که در فراق رخت

Ҷдошд аз дили ман сабри вази танами ором

جداشد از دل من صبر وز تنم آرام

Ки меравад ки марои пеши ёр ёд кунад

که می رود که مرا پیش یار یاد کند

Ки меравад ки маро назд ӯ баради пайғом

که می رود که مرا نزد او برد پیغام

Ки меравад ки бигӯед ки хӯни моти ҳалол

که می رود که بگوید که خون مات حلال

Валек бе миннати ин айшу коми боди ҳаром

ولیک بی منت این عیش و کام باد حرام

Ки медиҳад хабари оннигор меҳри гусал

که می دهد خبر آن نگار مهر گسل

Ки ним мурдаи ишқати тамоми гашти тамом

که نیم مرده عشقت تمام گشت تمام

зи ҳоли зори ман ӯро хабар диҳед касе

ز حال زار من او را خبر دهید کسی

Ки сӯхтами зи ғами охир чаҳ май хурӣ май хом

که سوختم ز غم آخر چه می خوری می خام

Марои длист ба сад пора бе ту сабр чаҳ суд

مرا دلیست به صد پاره بی تو صبر چه سود

Ки ҳеҷ менапазирад ба сабру ҷаҳди анҷом

که هیچ می نپذیرد به صبر و جهد انجام

Ба лаб расед марои ҷон дар орзӯии лабат

به لب رسید مرا جان در آرزوی لبت

Чаҳ вақти онкии ту брлби ниҳодае лаби ҷом

چه وقت آنکه تو برلب نهاده ای لب جام

Чаҳ рӯзи онкии ту дар субҳдами хурии бода

چه روز آنکه تو در صبحدم خوری باده

Ки рӯзи умрами ман хаста дил расед ба шом

که روز عمرم من خسته دل رسید به شام

Ман аз ғами ту худ ва дӯстон нишаста ба ғам

من از غم تو خود و دوستان نشسته به غم

Ту пеши душману бдгўӣ ман нишаста ба ком

تو پیش دشمن و بدگوی من نشسته به کام

Ман аз фироқи ту саргаштаам ба кӯҳу камар

من از فراق تو سرگشته ام به کوه و کمر

Ту ҳамчуи кӯҳи камари бастае ба кӣнаи мудом

تو همچو کوه کمر بسته ای به کینه مدام

зи бас ки аз ғами ҳиҷрати фусурдаи гашти дилам

ز بس که از غم هجرت فسرده گشت دلم

Гуҳӣ ба кӯҳ кунам ҷойу гуҳ ба боғи мақом

گهی به کوه کنم جای و گه به باغ مقام

Шуданд шефта аз оҳи ман вуҳушу туюр

شدند شیفته از آه من وحوش و طیور

Бсухт бар ман мискини дили сўому ҳавоам

بسوخت بر من مسکین دل سوام و هوام

зи шавқ рӯй ту дар субҳдам ба ёрии ман

ز شوق روی تو در صبحدم به یاری من

Адо кунанд нўосорӣу Чехияову ҳаммом

ادا کنند نواساری و چکاو و حمام

Ба хоб дар саҳарии ин ғазали зи пардаи рост

به خواب در سحری این غزل ز پرده راست

Самоъ кардаам аз булбулии фасеҳи калом

سماع کرده ام از بلبلی فصیح کلام