Ҳиси ҷаҳонгири ту мамлакат ҷон гирифт

حسن جهانگیر تو مملکت جان گرفت

Куфри сари зулфи ту олам имон гирифт

کفر سر زلف تو عالم ایمان گرفت

Дил чу насим ту ёфт ҷома ба сад ҷодрид

دل چو نسیم تو یافت جامه به صد جا درید

Дида чу рӯй ту дид тарки дил ва ҷон гирифт

دیده چو روی تو دید تَرک دل و جان گرفت

Ҷон бишуду остин бар ман мискин фишонд

جان بشد و آستین بر من مسکین فشاند

Дил шуду якборагии доман ҷонон гирифт

دل شد و یکبارگی دامن جانان گرفت

Ҷомаи ҷон пора шуд дар тани ман аз ғамат

جامهٔ جان پاره شد در تن من از غمت

То ғами ҳиҷрати марои боз гиребон гирифт

تا غم هجرت مرا باز گریبان گرفت

Дрҳўси ишқи ту хона барандохт сабр

در هوس عشق تو خانه برانداخت صبر

Ақли зи девонагии роҳ биёбон гирифт

عقل ز دیوانگی راه بیابان گرفت

Гар сар ман шуд ба бод дар ғами ту гӯ бирав

گر سر من شد به باد در غم تو گو برو

Каз паии як мухтасари тарк ту натавон гирифт

کز پی یک مختصر ترک تو نتوان گرفت

Гашти парешони дилам дар ҳаваси зулфи ту

گشت پریشان دلم در هوس زلف تو

То ватани худ дар он зулф парешон гирифт

تا وطن خود در آن زلف پریشان گرفت

Дасти сабо бар рахти зулф чу чавгонат зад

دست صبا بر رخت زلف چو چوگانت زد

Гӯии занхдонатро дар хам чавгон гирифт

گوی زنخدانت را در خم چوگان گرفت

Гар хати ту Хизр нест аз чаҳ сабаб чун Хизр

گر خط تو خضر نیست از چه سبب چون خضر

Обхўри хешро чашма ҳайвон гирифт

آبخور خویش را چشمهٔ حیوان گرفت

Лаъли ту худ олимӣ дошт ба зери нигин

لعل تو خود عالمی داشت به زیر نگین

Боз ба маншури хати малик сулаймон гирифт

باز به منشور خط ملک سلیمان گرفت

Навбати панҷуми бузади ҳасани ту дар шаш ҷиҳат

نوبت پنجم بزد حسن تو در شش جهت

Ҳафт фалак бар дараш поя дарбон гирифт

هفت فلک بر درش پایهٔ دربان گرفت

Рӯй ту шуд дар камоли моҳи шаби чордаҳ

روی تو شد در کمال ماه شب چارده

Лек хусуфи хатат дар ма тобон гирифт

لیک خسوف خطت در مه تابان گرفت

Бар занах овардае сӯзи дили ману зон

بر زنخ آورده‌ای سوز دل من وز آن

Дӯди дили ман турои гирд занхдон гирифт

دود دل من تو را گرد زنخدان گرفت

Сару миён чаман мекунад оғози рақс

سرو میان چمن می‌کند آغاز رقص

То қади ту шеваи сарв хиромон гирифт

تا قد تو شیوهٔ سرو خرامان گرفت

Буии сари зулфи ту бод ба гулзори барад

بوی سر زلف تو باد به گلزار برد

Булбули масти он замони роҳ гулистон гирифт

بلبل مست آن زمان راه گلستان گرفت

То писар ҳамгараст булбули боғи сухан

تا پسر همگر است بلبل باغ سخن

Аз нафасаши андалеби нағма ва дастон гирифт

از نفسش عندلیب نغمه و دستان گرفت

Дар сифати ҳасани ту табъи ғазали гӯй ӯ

در صفت حسن تو طبع غزل‌گوی او

Тайра аъшӣ намӯд одат ҳисон гирифт

طیرهٔ اعشی نمود عادت حسّان گرفت

Аз назари меҳри ту оина Эй шуд дилаш

از نظر مهر تو آینه‌ای شد دلش

Коинаҳи осмони равшанӣ аз он гирифт

کآینه آسمان روشنی از آن گرفت