Мадаи фиреби мароин ақли хоси табъат ро

مده فریب مراین عقل خاص طبعت را

Ба табъи шърпрст ва ба шеъри оми фиреб

به طبع شعرپرست و به شعر عام فریب

зи фахри шеъри неи ҷоҳ ту расад ба фароз

ز فخر شعر نی جاه تو رسد به فراز

зи нанги шеъри сари қадар ман равад ба нишеб

ز ننگ شعر سر قدر من رود به نشیب

Агар ту шеъри бгўӣии нмондти озарм

اگر تو شعر بگوئی نماندت آزرم

Ман ар ба шеър гароем расонадами осеб

من ار به شعر گرایم رساندم آسیب

На завқ ёбад азуи лиззат ва на тани қӯт

نه ذوق یابد ازو لذت و نه تن قوت

Агар чаҳ созад заргари зи зару анбари себ

اگر چه سازد زرگر ز زر و عنبر سیب

Ба истиқомати аҳвол бо замона бакӯш

به استقامت احوال با زمانه بکوش

Чу даври гашти бозанби ту низ рӯи бозеб

چو دور گشت باذنب تو نیز رو بازیب