Ҷон ба ҷонон кӣ расад ҷонони куҷоу ҷони куҷо

جان به جانان کی رسد جانان کجا و جان کجا

Заррааст ин , офтобаст , ин куҷо ва он куҷо

ذره است این، آفتاب است، این کجا و آن کجا

Даст мо гирад магар дар роҳи ишқати ҷазба Эй

دست ما گیرد مگر در راه عشقت جذبه‌ای

Варна пои мо куҷои венаи роҳ бе поёни куҷо

ورنه پای ما کجا وین راه بی‌پایان کجا

Тарк ҷон гуфтам ниҳодами по ба саҳрои талаб

ترک جان گفتم نهادم پا به صحرای طلب

То дар он водии маро аз тан барояд ҷони куҷо

تا در آن وادی مرا از تن برآید جان کجا

Ҷисми ғами Фрсўди ман чун оварад тоби фироқ

جسم غم فرسود من چون آورد تاب فراق

Ин тани лоғари куҷои бори ғами ҳиҷрони куҷо

این تن لاغر کجا بار غم هجران کجا

Дар лаб ёраст оби зиндагӣ дар ҳайратам

در لب یار است آب زندگی در حیرتم

Хизр мерафт аз паии сарчашмаи ҳайвони куҷо

خضر می‌رفت از پی سرچشمهٔ حیوان کجا

Чун ҷарас бо нола умрӣ шуд ки раҳ тай ме кунад

چون جرس با ناله عمری شد که ره طی می‌کند

То расад ҳотиф ба гирди маҳмили ҷонони куҷо

تا رسد هاتف به گرد محمل جانان کجا