Шабу рӯзӣ ба поёнгар туро дар васл ёр ояд
شب و روزی به پایان گر تو را در وصل یار آید
Ғанимати дон ки бе мо ва ту баси лайл ва наҳор ояд
غنیمت دان که بی ما و تو بس لیل و نهار آید
Шитобат чист эй ҷон аз танами хоҳии бурун рафтан
شتابت چیست ای جان از تنم خواهی برون رفتن
Дамӣ аз ҷисми ман беруни Марв шояд ки ёр ояд
دمی از جسم من بیرون مرو شاید که یار آید
Ту эй сарви равон то аз канорам бесабаб рафтӣ
تو ای سرو روان تا از کنارم بیسبب رفتی
Шабу рӯз аз ду чашмами ашки ҳасрат дар канор ояд
شب و روز از دو چشمم اشک حسرت در کنار آید
Шудам давр аз диёри ёр ва шуд умрӣ ки сӯии ман
شدم دور از دیار یار و شد عمری که سوی من
На мактубии з ёр ояд на пайкӣ зон диёр ояд
نه مکتوبی ز یار آید نه پیکی زان دیار آید
Азуи ҳотиф ба ин умеди дил хуш кардаму мардум
ازو هاتف به این امید دل خوش کردم و مردم
Ки шояд гоҳ-гоҳеи баъди маргам бар мазор ояд
که شاید گاهگاهی بعد مرگم بر مزار آید