Гул доғаст ки саҳрои дилам хуррам азуаст
گل داغ است که صحرای دلم خرّم ازوست
Хӯн гармаст ки носури маро марҳам азуаст
خون گرم است که ناسور مرا مرهم ازوست
Ҳар чаҳ аз дӯст расад нохушу хуш , хуш бошад
هر چه از دوست رسد ناخوش و خوش، خوش باشد
Шарбати васли азу , талхии ҳиҷрон ҳам азуаст
شربت وصل ازو، تلخی هجران هم ازوست
Ҳалқаи бандагии ишқ ба мо арзонӣ
حلقهٔ بندگی عشق به ما ارزانی
Ки дар ангушти сулаймонии мо хотам азуаст
که در انگشت سلیمانی ما خاتم ازوست
Ба ки то ваъдаи дидор , вафо созад ёр
به که تا وعدهٔ دیدار، وفا سازد یار
Нигарони чашми дили муҳаррам ва номаҳрам азуаст
نگران چشم دل محرم و نامحرم ازوست
Миннати абри баҳор аз раг мижгон дорем
منّت ابر بهار از رگ مژگان داریم
Кишти умеди ҷигари ташнаи моро нам азуаст
کشت امید جگر تشنهٔ ما را نم ازوست
Ишқ кӯ шуд ба саранҷоми дили об шуда
عشق کو شد به سرانجام دل آب شده
Қуфли ганҷинаи гул , дар гиреҳ шабнам азуаст
قفل گنجینهٔ گل، در گره شبنم ازوست
Беҳтар онаст ки созам ба парешонеи дил
بهتر آن است که سازم به پریشانی دل
Сари он зулф бинозам ки ҷаҳон дарҳам азуаст
سر آن زلف بنازم که جهان درهم ازوست
На садафи гашти паии гавҳари ирфони пайдо
نه صدف گشت پی گوهر عرفان پیدا
Эҳтироми малику манзалат одам азуаст
احترام ملک و منزلت آدم ازوست
Тоқи абрӯии ту , то қиблаи ушшоқ шудаи сет
طاق ابروی تو، تا قبلهٔ عشّاق شده ست
Пушти афлок ба таъзими дили мо хам азуаст
پشت افلاک به تعظیم دل ما خم ازوست
Сар савдо задагон зулфи туро нест чаро ?
سر سودا زدگان زلف تو را نیست چرا؟
Магари ошуфтагии хотири дилҳо кам азуаст
مگر آشفتگی خاطر دلها کم ازوست
Ин ҷавоби ғазали дилкаши саъдии сети ҳазин
این جواب غزل دلکش سعدی ست حزین
Ки неи хомаи оташи нафасамро дам азуаст
که نی خامهٔ آتش نفسم را دم ازوست