Дишаб ки чашми масти ту хотири навоз буд

دیشب که چشم مست تو خاطر نواز بود

То субҳ бар рухам дар майхонаи боз буд

تا صبح بر رخم در میخانه باز بود

Рӯзӣ ки ишқ , хоки диёри ниёзи гашт

روزی که عشق، خاک دیار نیاز گشت

Сарви ту хўшхром , ба гулгашти ноз буд

سرو تو خوشخرام، به گلگشت ناز بود

То дилхароши булбули ман завқ нола дошт

تا دلخراش بلبل من ذوق ناله داشت

Гулбун ба сарфарозӣу гулшан ба соз буд

گلبن به سرفرازی و گلشن به ساز بود

Бениши нигар ки оинаи муҳаррам гирифта аст

بینش نگر که آینه محرم گرفته است

Рӯе ки аз нигоҳи маниши эҳтироз буд

رویی که از نگاه منش احتراز بود

Тарафӣ набастаем азон оташини изор

طرفی نبسته ایم ازان آتشین عذار

Восўхтни талофии сӯзу гудоз буд

واسوختن تلافی سوز و گداز بود

Наздик шуд ки аз нафаси нолаи бушковад

نزدیک شد که از نفس ناله بشکفد

Меҳри лабам ки ғунчаи бустони роз буд

مهر لبم که غنچهٔ بستان راز بود

Як мӯӣ дар ҳалоки ҳазин кӯтаҳӣ накард

یک موی در هلاک حزین کوتهی نکرد

Зулфӣ ки сояпарвар умри дароз буд

زلفی که سایه پرور عمر دراز بود