То сарвро ҳавои қадат сарфароз кард

تا سرو را هوای قدت سرفراز کرد

По аз гилӣми ноз чу зулфат дароз кард

پا از گلیم ناز چو زلفت دراز کرد

Печиди буии ҷон , ба димоғи дилами зи давр

پیچید بوی جان، به دماغ دلم ز دور

Машшотаи сабои сари зулфат чу боз кард

مشاطهٔ صبا سرِ زلفت چو باز کرد

Кунинро чу мардуми чашмам ба хӯни нишонд

کونین را چو مردم چشمم به خون نشاند

Оҳи ин чаҳ нағма буд ки ишқи ту соз кард ?

آه این چه نغمه بود که عشق تو ساز کرد؟

Чашмат ба як киришма ба рӯй дилам гушӯд

چشمت به یک کرشمه به روی دلم گشود

Ҳар дар ки бахт бар рухи ҷонам фароз кард

هر در که بخت بر رخ جانم فراز کرد

Зоҳид ба завқи саҷдаи миҳроби абрўбт

زاهد به ذوق سجدهٔ محراب ابروبت

Дар каъбаи рӯ ба қиблаи Кувайт намоз кард

در کعبه رو به قبلهٔ کویَت نماز کرد

Маҳмӯдро чу қатъ таъаллуқ шуд аз ҳаёт

محمود را چو قطع تعلّق شد از حیات

Пайванди ҷон ба риштаи зулф Аёз кард

پیوند جان به رشتهٔ زلف ایاز کرد

Бо абрӯии ту пушт ба пуштаст дар ҷафо

با ابروی تو پشت به پشت است در جفا

Чашмат ки дасти фитна дар оғӯш ноз кард

چشمت که دست فتنه در آغوش ناز کرد

Чун ҷони баради зи шасти нигоҳати дили ҳазин ?

چون جان برد ز شست نگاهت دل حزین ؟

Натавон зи захми тири қазо эҳтироз кард

نتوان ز زخم تیر قضا احتراز کرد