Шамъро шуъла , мусалсали з дил ояд берун
شمع را شعله، مسلسل ز دل آید بیرون
Оҳи ҷони сӯхтагон муттасил ояд берун
آه جان سوختگان متصل آید بیرون
Дар ҷаҳон чанд ба ойӣна Сикандар нозад ?
در جهان چند به آیینه سکندر نازد؟
Чаҳ тамошост ки аз парда дил ояд берун ?
چه تماشاست که از پرده دل آید بیرون؟
Чашми нзоргёни лоиқи дидор ту нест
چشم نظارگیان لایق دیدار تو نیست
Ба тамошои ту ҳар кас хаҷал ояд берун
به تماشای تو هر کس خجل آید بیرون
Дар чамангар қади шамшод ба нози афрозӣ
در چمن گر قد شمشاد به ناز افرازی
Қамарӣ аз миннати сарв чгл ояд берун
قمری از منّت سرو چگل آید بیرون
Дил хӯн гашта шавадгар ба мисли ранги ҳино
دل خون گشته شود گر به مثل رنگ حنا
Мушкил аз дасти ту паймон гусал ояд берун
مشکل از دست تو پیمان گسل آید بیرون
Зулфи мишкӣни ту ҳар ҷо ки шавад ғолияи со
زلف مشکین تو هر جا که شود غالیه سا
Накҳат аз нофаи чин мунфаил ояд берун
نکهت از نافهٔ چین منفعل آید بیرون
Ин гуҳар нест ки нашимурда ба хоки афшонам
این گهر نیست که نشمرده به خاک افشانم
Ашки гулранг ба сад хӯн дил ояд берун
اشک گلرنگ به صد خون دل آید بیرون
Синаи сайқалгарӣ аз поси дамаш бояд кард
سینه صیقل گری از پاس دمش باید کرد
Субҳро то нафасӣ муътадил ояд берун
صبح را تا نفسی معتدل آید بیرون
Тани хокӣ ба раҳами турфа тилисмӣаст ҳазин
تن خاکی به رهم طرفه طلسمی است حزین
Хуррами он рӯз ки поем згл ояд берун
خرم آن روز که پایم زگل آید بیرون