Боз ишқ омаду кори дили азу мушкил шуд

باز عشق آمد و کار دل ازو مشکل شد

Ҳар чаҳ тадбири хирад буд ҳама ботил шуд

هر چه تدبیر خرد بود همه باطل شد

Хостами ишқ батон кам шавад , афзӯн гардид

خواستم عشق بتان کم شود، افزون گردید

Гуфтам : осон шавад ин кор , басӣ мушкил шуд

گفتم: آسان شود این کار، بسی مشکل شد

Пой ҳар кас , ки басари манзили ишқ ту расед

پای هر کس، که بسر منزل عشق تو رسید

Охроломри сараши хоки ҳамон манзил шуд

آخرالامر سرش خاک همان منزل شد

Ашк , чун роз дилам гуфт , фитод аз назарам

اشک، چون راز دلم گفت، فتاد از نظرم

Бо вуҷӯдӣ ки бсди хӯни ҷигар ҳосил шуд

با وجودی که بصد خون جگر حاصل شد

Он сеӣ сарв , ки майли дили мо ҷониб ӯст

آن سهی سرو، که میل دل ما جانب اوست

Ёрб ! аз баҳр чаҳ сӯии дгарон моил шуд ?

یارب! از بهر چه سوی دگران مایل شد؟

Ғам набӯд он : ки Муродӣ бтғоФл мекишт

غم نبود آن: که مرا دی بتغافل میکشت

Ғам аз онаст ки : имрӯз чаро ғофил шуд ?

غم از آنست که: امروز چرا غافل شد؟

Шаби васли ту ҳилолии қадаҳ аз дасти надод

شب وصل تو هلالی قدح از دست نداد

Магар аз ҷоми лабати бихўд ва лоиъқл шуд ?

مگر از جام لبت بیخود و لایعقل شد؟

Аҳл айшанд , ҳилолӣ , ҳамаи риндон , лекин

اهل عیشند، هلالی، همه رندان، لیکن

Зон миёни гӯшаи андӯҳи маро манзил шуд

زان میان گوشه اندوه مرا منزل شد

Хониш
шморҳ 119 — ъндлӣб