Ҷони ман , баҳри ту аз ҷони баданӣ сохта анд
جان من، بهر تو از جان بدنی ساختهاند
Бар вай аз риштаи ҷони перҳанӣ сохта анд
بر وی از رشته جان پیرهنی ساختهاند
Бар гулати сабзаи ънбршкнӣ сохта анд
بر گلت سبزه عنبرشکنی ساختهاند
Аз гулу сабзаи аҷоиби чаманӣ сохта анд
از گل و سبزه عجایب چمنی ساختهاند
Тани симини ту нозук , дили сангини ту сахт
تن سیمین تو نازک، دل سنگین تو سخت
Булъаҷаби сангдилу сими танӣ сохта анд
بوالعجب سنگدل و سیمتنی ساختهاند
Аллоҳ ! аллоҳ ! чаҳ тавон гуфт руху зулфи туро ?
الله! الله! چه توان گفت رخ و زلف ترا؟
Гўиё аз гулу сунбули чаманӣ сохта анд
گوییا از گل و سنبل چمنی ساختهاند
Хуши биханд , эй гули бустони латофат , ки туро
خوش بخند، ای گل بستان لطافت، که ترا
Бар гул аз ғунчаи хандони даҳанӣ сохта анд
بر گل از غنچه خندان دهنی ساختهاند
Ман ки бошам ки ту гӯйии сухани ҳамчуи манӣ ?
من که باشم که تو گویی سخن همچو منی؟
Мардум аз баҳри дили ман суханӣ сохта анд
مردم از بهر دل من سخنی ساختهاند
намекунам кӯҳи ғам аз ҳасрати ширини даҳанон
میکنم کوه غم از حسرت شیریندهنان
Аз ман , ин сангдилон , кӯҳканӣ сохта анд
از من، این سنگدلان، کوهکنی ساختهاند
Баъди азин роз ҳилолӣ натавон дошт ниҳон
بعد ازین راز هلالی نتوان داشت نهان
Ки баҳри хилват аз он анҷуманӣ сохта анд
که بهر خلوت از آن انجمنی ساختهاند